महासमुंद।45 वर्षों से सूखे की मार झेल रहे किसानों को अब सिकासार–कोडार नहर लिंक परियोजना के तहत सिंचाई और पेयजल की स्थायी सुविधा मिलने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से महासमुंद और गरियाबंद जिलों के कुल 178 गांवों को लाभ पहुंचाने की योजना है।
पहले चरण में 75 गांवों को मिलेगा लाभ
परियोजना के शुरुआती चरण में महासमुंद जिले के 40 गांवों और गरियाबंद जिले के 35 गांवों को पानी उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना मार्च से पहले शुरू हो जाएगी, जिससे आगामी खरीफ और रबी सीजन में किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।
नहर लिंक परियोजना के तहत प्रदेश में पहली बार डैम से डैम तक भूमिगत पाइपलाइन
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि छत्तीसगढ़ में पहली बार एक डैम से दूसरे डैम तक भूमिगत स्टील पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाया जाएगा। इससे जल की बर्बादी रुकेगी और सिंचाई व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहेगी।लिंक प्रोजेक्ट के अंतर्गत 88.50 किलोमीटर लंबी स्टील पाइपलाइन बिछाई जाएगी।
15 एमसीएम पानी से बढ़ेगा कृषि उत्पादन
इस पाइपलाइन के जरिए झलप–बागबाहरा क्षेत्र के 40 गांवों को 15 मिलियन घन मीटर (एमसीएम) पानी सिंचाई और पेयजल के लिए मिलेगा। इससे करीब 4 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई संभव होगी, जिससे उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद है।
2585 करोड़ की लागत, 25% पानी की होगी बचत
परियोजना पर कुल 2585.58 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से जल आपूर्ति होने के कारण वाष्पीकरण नहीं होगा, जिससे लगभग 25 प्रतिशत (31 एमसीएम) पानी की बचत होगी।सिकासार डैम से पानी सीधे केशवा और कोडार जलाशयों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे उनकी घटती क्षमता को फिर से बढ़ाया जा सकेगा।
पलायन पर लगेगी रोक
बागबाहरा क्षेत्र पूरी तरह कृषि पर निर्भर है, लेकिन सिंचाई के अभाव में यहां के किसान हर साल ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश पलायन करने को मजबूर होते रहे हैं। इस परियोजना के पूरा होने से न केवल सिंचाई सुविधा बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
जलाशयों की घटती क्षमता होगी बहाल
पिछले 25 वर्षों में कोडार जलाशय की क्षमता में 25.67% और केशवा नाला जलाशय में 34.13% की कमी दर्ज की गई है। इस परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य इन जलाशयों को उनकी पूर्ण जलभराव क्षमता तक पुनः पहुंचाना है।
सेंसर और कमांड कंट्रोल से पहुंचेगा पानी
जिन गांवों से पाइपलाइन गुजरेगी, वहां अलग-अलग आउटलेट कनेक्शन दिए जाएंगे। जरूरत के अनुसार कमांड कंट्रोल रूम से सेंसर आधारित स्काडा सिस्टम के जरिए खेतों तक सीधे पानी छोड़ा जाएगा। यह आधुनिक तकनीक परियोजना को पूरी तरह स्मार्ट और भविष्य उन्मुख बनाती है।
तकनीकी सर्वे पूरा, जल्द शुरू होगा काम
जल संसाधन विभाग गरियाबंद के कार्यपालन अभियंता एस.के. बरमन ने बताया कि सिकासार–कोडार जलाशय लिंक परियोजना का तकनीकी सर्वे पूरा हो चुका है। केशवा और कोडार जलाशयों में पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।





