सरायपाली(जीतयादव)। शासकीय आदिवासी कन्या आश्रम डूडुमचुंवाँ में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। इसके बाद छात्राओं ने विद्यालय के शिक्षकों का पुष्पगुच्छ भेंट कर एवं तिलक-चंदन लगाकर स्वागत और वंदन किया।
छात्राओं ने शिक्षकों का तिलक-चंदन और पुष्पगुच्छ से किया सम्मान, डूडुमचुंवाँ में गुरु के महत्व और स्व-अभ्यास पर दिए प्रेरणादायी संदेश।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान पाठक कु. अंजनी चौहान ने कहा कि माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धा व्यक्त करने का सबसे श्रेष्ठ माध्यम है। उन्होंने छात्राओं को जीवन में सदैव अपने गुरुजनों का सम्मान करने और उनके बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर शिक्षक सुंदर लाल डडसेना मधुर ने अपनी कविता ‘गुरु चरणों में अर्पण’ प्रस्तुत की। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से गुरु के महत्व और उनके द्वारा जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाने का संदेश दिया।
वहीं शिक्षक डींगर दास वैष्णव ने गुरु द्रोणाचार्य और एकलव्य की कहानी के माध्यम से छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने कहा कि स्वयं का अभ्यास और सीखने की लगन व्यक्ति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कार्यक्रम के अंत में आश्रम के गार्ड पूनम सिदार ने भी सभा को संबोधित किया और छात्राओं को गुरुजनों के प्रति सम्मान एवं अनुशासन बनाए रखने का संदेश दिया।
इस अवसर पर डूडुमचुंवाँ के प्रधान पाठक कु. अंजनी चौहान, शिक्षक डींगर दास वैष्णव, सुंदर लाल डडसेना, स्कूल गार्ड पूनम सिदार, स्वीपर पिरोबती सागर, रसोइया प्रियंका साव एवं सुशीला जायसवाल सहित आश्रम की छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण एवं भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ।


