बसना(जीतयादव) शासकीय प्राथमिक शाला बरोली में पदस्थ सहायक शिक्षक श्री जुगल किशोर बुड़ेक बीते 12 नवंबर 2025 से लगातार तीन माह से अधिक समय से बिना किसी लिखित सूचना के अनुपस्थित हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय बाद भी उनके खिलाफ कोई ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है। शिक्षा विभाग में लापरवाही किस हद तक जड़ें जमा चुकी है, इसका चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला बसना विकासखंड से सामने आया है।
बरोली में लापरवाही की हदें पार, अधिकारियों की चुप्पी से बच्चों का भविष्य अधर में।
सूत्रों के अनुसार शिक्षक की लगातार अनुपस्थिति को लेकर शाला स्तर, संकुल समन्वयक एवं विकासखंड कार्यालय तक कई बार निरीक्षण प्रतिवेदन भेजे गए। इसके बावजूद शिक्षा विभाग की ओर से केवल औपचारिकता निभाते हुए 21 नवंबर 2025 को एक स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया, जिसका न तो कोई जवाब दिया गया और न ही शिक्षक ने विद्यालय में उपस्थिति दर्ज कराई।
96 बच्चों की पढ़ाई तीन शिक्षकों के भरोसे
शासकीय प्राथमिक शाला बरोली में वर्तमान में 96 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और कुल 4 शिक्षक पदस्थ हैं। एक शिक्षक के तीन माह से अनुपस्थित रहने के कारण विद्यालय की पूरी शैक्षणिक जिम्मेदारी केवल तीन शिक्षकों पर आ गई है। अन्य शिक्षक पूरी निष्ठा से बच्चों को पढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन स्टाफ की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
बिना काम वेतन मिलने की चर्चा
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह सामने आ रहा है कि तीन माह से विद्यालय में उपस्थित न होने के बावजूद संबंधित शिक्षक को नियमित वेतन मिलने की चर्चा है। यदि यह तथ्य सही है, तो यह न केवल शासकीय नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि ईमानदारी से कार्य कर रहे शिक्षकों और ग्रामीण अंचल के बच्चों के साथ भी बड़ा अन्याय है।
नेटवर्क मार्केटिंग में संलिप्तता का आरोप
जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि संबंधित शिक्षक किसी नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी के कार्य में सक्रिय रूप से संलग्न हैं और इसी कारण वह विद्यालय नहीं आ रहे हैं। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह मामला केवल अनुपस्थिति का नहीं, बल्कि शासकीय सेवा नियमों के गंभीर उल्लंघन और कर्तव्यहीनता का बन जाता है।
ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। शाला विकास समिति बरोली के अध्यक्ष प्रहलाद साहू, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि एवं प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति गढ़फुलझर के अध्यक्ष कमलेश साव तथा ग्राम प्रमुख विजय भूषण साव ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि तीन माह से शिक्षक के लापता रहने के बावजूद कोई कार्रवाई न होना ग्रामीण अंचल के बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
ग्रामीण प्रतिनिधियों ने एक स्वर में मांग की है कि अनुपस्थित शिक्षक पर तत्काल कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए, उसका वेतन रोका जाए तथा उसके स्थान पर शीघ्र वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था की जाए, ताकि विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियां सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
लिखित शिकायत के बावजूद कार्रवाई शून्य
इस संबंध में शासकीय प्राथमिक शाला बरोली के प्रधानपाठक द्वारा 08 जनवरी 2026 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई है। शिकायत के साथ संकुल समन्वयक एवं शाला विकास समिति का निरीक्षण पंजी, बीईओ कार्यालय द्वारा जारी आदेश तथा नवंबर, दिसंबर और जनवरी 2026 की उपस्थिति पंजी की छायाप्रति भी संलग्न की गई है।
बड़ा सवाल – जिम्मेदार कौन?
तीन माह तक बिना सूचना अनुपस्थित रहने वाले शिक्षक पर न तो निलंबन हुआ, न वेतन रोका गया और न ही कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। इससे यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है?
क्या शिक्षा विभाग के अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं, या फिर ग्रामीण अंचलों की शिक्षा व्यवस्था को यूं ही भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है?






