बसना। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश की माटी, लोकसंस्कृति और गौरवशाली परंपराओं को समर्पित छत्तीसगढ़ी लोकगीत ‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’ का 1 नवंबर को भव्य लोकार्पण किया गया। यामिनी स्टूडियो छत्तीसगढ़ की इस विशेष संगीतमय प्रस्तुति का विमोचन बसना विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल ने किया।
बसना विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल ने किया लोकार्पण, गीत के जरिए लोकसंस्कृति, परंपरा और माटी की महक को संजोने की कोशिश।
इस अवसर पर विधायक डॉ. अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पवित्र माटी, समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं को गीत-संगीत के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास सराहनीय है। उन्होंने कहा कि यह गीत नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
गीत में दीपक कुमार साहू और प्रतिभा त्रिपाठी ने स्वर दिया है, जबकि अभिनय गोरे बरिहा और सुषमा कैवर्त ने किया है। इसके भावपूर्ण बोल शिक्षक एवं साहित्यकार प्रेमचन्द साव ‘प्रेम’ ने लिखे हैं। संगीत संयोजन ताम्रध्वज केंवट ने किया है और निर्माता कमलेश कुमार साहू हैं। गीत की रिकॉर्डिंग स्वर म्यूजिक एकेडमी एवं रिकॉर्डिंग स्टूडियो, भिलाई में हुई है।
इस प्रस्तुति की प्रमुख गायिका प्रतिभा त्रिपाठी का राज्य शिक्षक पुरस्कार सत्र 2026-27 के लिए चयन भी चर्चा का विषय रहा। उनकी इस उपलब्धि को शिक्षा और संगीत दोनों क्षेत्रों में उनके योगदान से जोड़कर देखा जा रहा है।
गीत निर्माण में अमर स्टूडियो गिरसा, तावसिफ जमाल, कोरियोग्राफर संदीप भारती, कैमरामैन रविकांत साहू, एडिटर अभिजीत भारती, मेकअप टीम सहित अन्य सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। लोकार्पण के अवसर पर विधायक के निज सचिव नरेंद्र बोरे और वरिष्ठ कार्यकर्ता रमेश अग्रवाल उपस्थित रहे।


