सरायपाली(जीतयादव)। बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में प्रस्तावित हीरा खनन परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल ने परियोजना के अगले चरण के तहत बड़े व्यास (लार्ज डायमीटर) की ड्रिलिंग शुरू करने को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से क्षेत्र में हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन करने और भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद बढ़ गई है।
लार्ज डायमीटर ड्रिलिंग को मंजूरी, वैज्ञानिक आकलन के बाद व्यावसायिक डायमंड खनन की दिशा में बढ़ेगा कदम।
नई दिल्ली में आयोजित निदेशक मंडल की बैठक में परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए गए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद डायमंड भंडार का सटीक मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके आधार पर विस्तृत फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार होगी और व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में एनसीएल के निदेशक अमिताभ मुखर्जी एवं आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद, सीएमडीसी के प्रबंध संचालक रजत बंसल, उपेंद्र कुमार तथा विनय कुमार उपस्थित रहे।
परियोजना के शुरुआती चरण में स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के जरिए किम्बरलाइट पाइप की पहचान की गई थी। इसके बाद करीब 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जिसमें 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। इससे क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख हीरा उत्पादक देशों में भी शुरुआती चरण में इसी प्रकार की सफलता के बाद बड़े व्यावसायिक भंडार विकसित हुए थे। इसी कारण बलौदा-बेलमुंडी हीरा परियोजना को देश की महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है।
बैठक में राज्य की प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से 70 लाख टन प्रतिवर्ष तक बढ़ाया जाएगा। वहीं बैलाडीला डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में भी कार्य जारी है।
निदेशक मंडल ने सभी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई। छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा कि खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और संतुलित औद्योगिक विकास राज्य की आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि बलौदा-बेलमुंडी डायमंड परियोजना भविष्य में छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकती है।


