महासमुंद में बाल विवाह रोकथाम पर एकदिवसीय कार्यशाला, 2028 तक बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ का लक्ष्य
महासमुंद। छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में महासमुंद जिले में बड़ा कदम उठाया गया है। बुधवार को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के सभाकक्ष में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत नए प्रतिषेध अधिकारियों का एकदिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित हुई।
कार्यक्रम का आयोजन महिला एवं बाल विकास विभाग महासमुंद द्वारा किया गया। इसमें अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006, रिपोर्टिंग तंत्र और सामुदायिक सहभागिता के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। साथ ही बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की उपलब्धियों और बाल संरक्षण अधिनियम की महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी चर्चा हुई।
“2028-29 तक बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ का लक्ष्य”
मुख्य अतिथि नगर पालिका उपाध्यक्ष देवीचंद राठी ने कहा कि—
“राज्य में बाल विवाह के मामले अब बहुत कम हैं, लेकिन सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2028-29 तक पूरा छत्तीसगढ़ बाल विवाह मुक्त घोषित हो। इसके लिए हर स्तर पर सजगता जरूरी है।”
उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास से जिले को जल्द ही बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाएगा।
बेटी की शिक्षा ही सबसे बड़ा समाधान
कार्यशाला के दौरान परियोजना अधिकारी मनीषा साहू ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के अनुसार लड़कियों की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष है। अधिनियम के उल्लंघन पर दो साल तक की कैद और एक लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि—
“बेटी की शिक्षा ही बाल विवाह रोकने का मूल मंत्र है। शिक्षित बालिका न केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है, बल्कि समाज को भी प्रेरित करती है।”
साइबर जागरूकता और बेटी बचाओ अभियान
कार्यशाला में डीएसपी चुन्नू तिग्गा, नईम ख़ान, शरद मराठा, गौरव राठी, कल्पना सूर्यवंशी, राजू चंद्राकर समेत कई अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
पुलिस विभाग ने साइबर सुरक्षा और किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास पर विस्तृत जानकारी दी।
बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में प्रगति
परियोजना अधिकारी ने बताया कि “500 से अधिक बालिकाओं को स्कॉलरशिप दी गई है, जिससे शिक्षा के प्रति उनका झुकाव बढ़ा है।”
इसके अलावा, जिले में एनीमिया दर में 15% की कमी और स्कूल ड्रॉपआउट दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
कार्यक्रम के अंत में
सभी प्रतिभागियों ने बाल विवाह मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया और कहा कि यह पहल सिर्फ कानून का पालन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के सुरक्षित और शिक्षित भविष्य की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।



