वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर सरायपाली कॉलेज में सामूहिक गायन — विद्यार्थियों में जागी देशभक्ति की भावना
सरायपाली।स्वर्गीय राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह शासकीय कॉलेज, सरायपाली में शुक्रवार को राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में कॉलेज स्टाफ और विद्यार्थियों ने मिलकर वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया और भारत माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
प्राचार्य डॉ. संध्या भोई ने बताई ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक महत्ता
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संध्या भोई ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा —
“भारत की आजादी के आंदोलन में वंदे मातरम् ने जन-जन में राष्ट्रीय चेतना और एकता की भावना जगाई थी। यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणास्रोत बना।”
उन्होंने बताया कि वंदे मातरम् को सबसे पहले 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। बाद में 24 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्रगीत के रूप में औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया।
राष्ट्रगीत का महत्व और उद्देश्य
डॉ. भोई ने कहा कि “वंदे मातरम् हमें मातृभूमि के प्रति प्रेम, निष्ठा और बलिदान की भावना सिखाता है। यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता और स्वाभिमान का प्रतीक है।”
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने देशभक्ति के गीतों, भाषणों और कविताओं के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की भावना व्यक्त की।
वर्षभर चलेगा विशेष आयोजन
प्राचार्य ने यह भी बताया कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में पूरा वर्ष विविध सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
इन गतिविधियों में निबंध, भाषण, पोस्टर, क्विज़ प्रतियोगिता, सामूहिक गायन और देशभक्ति नाटक शामिल रहेंगे, जिनका उद्देश्य छात्रों में राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गर्व की भावना को बढ़ावा देना है।



