सरायपाली(जीतयादव)।सरस्वती शिशु मंदिर बलौदा के विद्यार्थियों के लिए इस वर्ष का शैक्षणिक भ्रमण अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं स्मरणीय रहा। विद्यालय के लगभग 90 छात्र-छात्राओं ने आचार्यों के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ के प्रमुख ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण किया। इस शैक्षणिक यात्रा में विद्यार्थियों ने लक्ष्मण मंदिर सिरपुर, कुंभ कल्प राजिम, त्रिवेणी संगम एवं पुरखौती मुक्तांगन का अवलोकन किया।
सरस्वती शिशु मंदिर बलौदा के छात्रों ने शैक्षणिक भ्रमण कर इतिहास व परंपरा को नजदीक से समझा।
सिरपुर स्थित सातवीं शताब्दी में निर्मित लक्ष्मण मंदिर, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है, वहां सरस्वती शिशु मंदिर बलौदा के विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला और धार्मिक परंपराओं की जानकारी दी गई। आचार्यों ने बताया कि यह मंदिर मुख्यतः भगवान विष्णु को समर्पित है, किंतु गर्भगृह में लक्ष्मण जी की प्रतिमा स्थापित है, जो इसकी ऐतिहासिक विशेषता को दर्शाती है।

इसके पश्चात विद्यार्थियों ने राजिम स्थित त्रिवेणी संगम, जहां महानदी, पैरी एवं सोंढूर नदियों का संगम होता है, में दर्शन कर भारतीय आस्था और धार्मिक विश्वासों को समझा। कुंभ कल्प के संत समागम में बच्चों ने संतों के प्रवचनों से नैतिक जीवन मूल्यों एवं भारतीय संस्कृति के महत्व को जाना।

शैक्षणिक भ्रमण का प्रमुख आकर्षण पुरखौती मुक्तांगन रहा, जहां विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातियों की जीवनशैली, आवास, वेशभूषा, नृत्य एवं लोक परंपराओं को नजदीक से देखा। बच्चों ने सुआ नृत्य, बैगा नृत्य, सैला, कर्मा और गेड़ी नृत्य के बारे में जानकारी प्राप्त की, जिससे उन्हें राज्य की सांस्कृतिक विविधता का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ।
सरस्वती शिशु मंदिर बलौदा विद्यालय की ओर से प्रधानाचार्य सरोज डडसेना, आशीष डडसेना, क्षीरसागर सिदार, मनोज जाम्हारे, वीणा साव, सस्मिता राजपूत, रोशनी साहू एवं प्राची भोई की उपस्थिति रही। सभी आचार्यों ने इस भ्रमण को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए उपयोगी बताया। छात्रों ने इसे एक यादगार अनुभव बताते हुए कहा कि इससे उन्हें अपने राज्य की संस्कृति और इतिहास को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला।




