पिथौरा(जीतयादव)। महासमुंद जिले के ग्राम सपोस में श्रावण मास के दौरान धार्मिक साहित्य के वितरण को लेकर रविवार को विवाद की स्थिति बन गई। जानकारी के अनुसार, संत रामपाल के अनुयायी गांव में घर-घर जाकर धार्मिक पुस्तकें वितरित कर रहे थे। इसकी सूचना मिलने पर सर्व हिंदू समाज और बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और पुस्तक वितरण का विरोध किया। दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बहस हुई, जिसके बाद स्थिति को शांत कराने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सपोस में सर्व हिंदू समाज और बजरंग दल ने जताई आपत्ति, शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर शुरू की जांच।
बताया जा रहा है कि बजरंग दल के पदाधिकारी कमलेश डड़सेना को सपोस में पुस्तक वितरण की सूचना मिली थी। इसके बाद वे सर्व हिंदू समाज के प्रतिनिधियों और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि वितरित की जा रही पुस्तकों में धार्मिक विषयों को लेकर आपत्तिजनक सामग्री है और इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसी आधार पर पुस्तक वितरण रोकने की मांग की गई।
वहीं, सर्व हिंदू समाज और बजरंग दल के कुछ पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम मेमरा स्थित एक आश्रम से आसपास के गांवों में धार्मिक साहित्य के प्रचार-प्रसार की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। संगठन से जुड़े गीतेश पंडा ने दावा किया कि सपोस में पुस्तकों की सामग्री से धार्मिक भावनाएं आहत होने और सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
विवाद बढ़ने पर सपोस में डायल-112 के माध्यम से पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया और आगे की कार्रवाई के लिए पिथौरा थाना आने के निर्देश दिए। इसके बाद सर्व हिंदू समाज और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने थाना पहुंचकर लिखित शिकायत सौंपते हुए मामले की जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की।
इस घटनाक्रम के दौरान कमलेश डड़सेना, गीतेश पंडा, अभिषेक दास, राजकुमार अग्रवाल, बलराज नायडू, रमेश श्रीवास्तव, राजा अग्रवाल और दुर्गेश यादव सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।मामले में थाना प्रभारी पिथौरा ने बताया कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। संबंधित पुस्तकों की सामग्री की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
समाचार लिखे जाने तक संत रामपाल के अनुयायियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


