महासमुंद। खैर लकड़ी के अवैध कारोबार, तस्करी और फर्जी एनओसी-बिलिंग के मामले में महासमुंद पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने ओडिशा और हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग ठिकानों पर दबिश देकर 95 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। इस कार्रवाई के साथ ही मामले में अब तक जब्त नकदी का कुल आंकड़ा 3 करोड़ 61 लाख 52 हजार 880 रुपये तक पहुंच गया है। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह से जुड़े ठिकानों से अब तक करीब 70 टन अवैध खैर लकड़ी और अनुमानित एक करोड़ रुपये कीमत के 9 वाहन भी जब्त किए जा चुके हैं।
हरिद्वार से गिरफ्तार मुख्य आरोपी संजय छापरिया की निशानदेही पर ओडिशा और हिमाचल प्रदेश में दबिश; 70 टन खैर लकड़ी और करीब एक करोड़ रुपये कीमत के 9 वाहन भी जब्त।
पुलिस के अनुसार, खैर लकड़ी के अवैध परिवहन के लिए इस्तेमाल किए गए एनटीपीएस (NTPS) एनओसी में कथित कूटरचना और धोखाधड़ी के मामले में थाना पिथौरा में 9 जुलाई 2026 को अपराध क्रमांक 172/2026 दर्ज किया गया था। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और भारतीय वन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत जांच की जा रही है।
इसी गिरोह से जुड़े खैर लकड़ी के अवैध कारोबार की प्रतिस्पर्धा को लेकर हुए जानलेवा हमले के मामले में फरार मुख्य आरोपी संजय छापरिया को महासमुंद पुलिस ने 18 अक्टूबर को हरिद्वार, उत्तराखंड से गिरफ्तार किया था। ट्रांजिट रिमांड पर महासमुंद लाए जाने के बाद पूछताछ के आधार पर पुलिस ने ओडिशा के बरगढ़ में कार्रवाई की।
पुलिस के मुताबिक, संजय छापरिया के आवास से 45 लाख रुपये और उसके सहयोगी टैक्स कंसल्टेंट के पास रखे 15 लाख रुपये जब्त किए गए। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में एक अन्य ठिकाने पर दबिश देकर 35 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इससे पहले भी हिमाचल प्रदेश से 1.70 करोड़ रुपये जब्त किए जा चुके थे।
पुलिस ने बताया कि अब तक गिरोह से जुड़े विभिन्न ठिकानों से कुल 70 टन खैर लकड़ी जब्त की गई है। जब्त वाहनों में चार ट्रक, एक डंपर, तीन कारें और एक मालवाहक पिकअप शामिल हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई गई है।
अपराध से अर्जित नकदी की कुर्की और आरोपियों को अवैध आर्थिक लाभ से वंचित करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है।



