सरायपाली (जीत यादव)। शासकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पाटसेन्द्री के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने हीराकुंड बाँध, सम्बलपुर चिड़ियाघर और माँ समलेश्वरी मंदिर का एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य बच्चों को पुस्तक से बाहर वास्तविक ज्ञान उपलब्ध कराना एवं प्राकृतिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व को समझाना था। स्टाफ के साथ गए प्रधान पाठक चन्द्रभानु पटेल ने पूरे भ्रमण के दौरान बच्चों को उपयोगी जानकारियाँ प्रदान कीं।

उन्होंने सबसे पहले हीराकुंड बाँध के महत्व को बताते हुए कहा कि यह बाँध जल संरक्षण, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने समझाया कि यदि पानी का सही प्रबंधन किया जाए तो यह खेती, उद्योग और पेयजल की विशाल जरूरतों को पूरा कर सकता है। हीराकुंड बाँध से उत्पन्न बिजली पर्यावरण के अनुकूल है और बड़ी मात्रा में भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान कर उसे उपजाऊ बनाती है। बच्चों ने बाँध को नजदीक से देखकर जल संसाधन प्रबंधन की वास्तविक प्रक्रिया को समझा।

इसके बाद विद्यार्थियों ने सम्बलपुर चिड़ियाघर का भ्रमण किया। यहाँ प्रधान पाठक ने बताया कि जू वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है, जहाँ दुर्लभ प्रजातियों को सुरक्षित वातावरण देकर उन्हें बचाया जाता है। चिड़ियाघर जैव विविधता के महत्व, पर्यावरण संरक्षण, जानवरों के व्यवहार और जीवनशैली के बारे में प्रत्यक्ष सीखने का अवसर प्रदान करता है। बच्चों ने विभिन्न वन्यजीवों को देखकर प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना विकसित की।

अंत में सभी ने माँ समलेश्वरी मंदिर में दर्शन किए और सांस्कृतिक विरासत को निकट से समझा। विद्यालय स्टाफ का मानना है कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण न सिर्फ बच्चों के ज्ञान का विस्तार करते हैं, बल्कि उनमें जिम्मेदारी, पर्यावरण प्रेम और सामाजिक जागरूकता भी बढ़ाते हैं।




