मुनाफे के लालच में सेहत से खिलवाड़ — एक्सपायरी और घटिया गुणवत्ता वाले सामान की खुली बिक्री
पिथौरा (जीत यादव )।पिथौरा क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की लापरवाही के कारण लोगों की सेहत पर खतरा मंडरा रहा है। मुनाफाखोरी के चक्कर में कई दुकानदार अमानक, एक्सपायरी और घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री बिना किसी डर के कर रहे हैं।
स्थानीय बाजारों में बच्चों के लिए बनाए गए कई पैकेटबंद उत्पादों की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी उनकी बिक्री जारी है। आकर्षक पैकेजिंग में बिकने वाले ये उत्पाद गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरते और कुछ मामलों में नकली या मिलावटी सामग्री पाई जा रही है।
खुले में बिक रहे दूषित खाद्य पदार्थ
बाजार और सड़क किनारे लगे ठेलों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थ खुले में रखे जाते हैं। इन पर गाड़ियों के धुएं, धूल और कार्बन की मोटी परतें जम जाती हैं, जिससे वे सेवन योग्य नहीं रहते।
फिर भी ये वस्तुएं प्रशासन की आंखों के सामने बिना किसी मानक या नियम के बेची जा रही हैं।
खाद्य विभाग की निष्क्रियता पर सवाल
जानकारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और निगरानी में भारी कमी है। अधिकारी केवल औपचारिक सैंपलिंग कर खानापूर्ति करते हैं। त्यौहारों के समय लिए गए सैंपल की रिपोर्ट आने में कई महीने लग जाते हैं, और तब तक असुरक्षित सामान बाजार में बिक चुका होता है।
खाद्य विभाग के अधिकारी अधिकांश समय जिला मुख्यालय में ही रहते हैं, जिससे पिथौरा जैसे क्षेत्रों में नियमित जांच नहीं हो पाती।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ व्यापारियों और अधिकारियों के बीच मिलीभगत होने के भी आरोप सामने आए हैं। जांच के नाम पर पैसे के लेन-देन की भी चर्चा है।
बीमारियों का बढ़ रहा खतरा
पिथौरा और आसपास के गांवों में नकली ब्रांडेड पैकिंग में मिलावटी सामानों की बिक्री तेजी से बढ़ी है।
इन असुरक्षित खाद्य पदार्थों के सेवन से हर दिन सैकड़ों लोग बीमार पड़ रहे हैं और स्थानीय अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह स्थिति जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।
अधिकारी बोले — होगी जांच
इस मामले में खाद्य सुरक्षा अधिकारी शांखनाद भोई ने कहा कि उन्हें शिकायत मिली है और मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।




