धमतरी। धमतरी जिले के गंगरेल स्थित मां अंगारमोती मंदिर में दीपावली के बाद पहले शुक्रवार को देव मड़ई का आयोजन हुआ। इस दौरान संतान प्राप्ति की मन्नत लेकर 800 से अधिक महिलाएं पेट के बल जमीन पर लेटीं। परंपरा के अनुसार बैगा उनके ऊपर से चलते हुए मां अंगारमोती माता के दरबार तक पहुंचे। यह परंपरा यहां वर्षों से चली आ रही है और लोग इसे आस्था से जोड़कर देखते हैं।

मंदिर के पुजारियों के मुताबिक यह परंपरा करीब 1000 साल पुरानी है। यहां छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां अंगारमोती के दरबार में आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, खासकर निःसंतान दंपतियों को संतान सुख प्राप्त होता है।
अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति ने जताया विरोध
इस परंपरा को लेकर अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति ने आपत्ति दर्ज की है। समिति के अध्यक्ष दिनेश मिश्र ने इसे अमानवीय और अनुचित बताते हुए इस परंपरा को बंद करने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में धमतरी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
वहीं, मां अंगारमोती मंदिर ट्रस्ट ने समिति के अध्यक्ष को कानूनी नोटिस भेजा है।
52 गांवों से देवी-देवताओं का आगमन
मान्यता के अनुसार देव मड़ई के दिन आसपास के 52 गांवों के देवी-देवता गंगरेल पहुंचते हैं। सभी देवी-देवता मिलकर ढाई परिक्रमा लगाते हैं और फिर मां अंगारमोती के दरबार में पहुंचकर भेंट अर्पित करते हैं।
भक्तों ने कहा — यह श्रद्धा का विषय है
संतान प्राप्ति की कामना से पहुंची महिलाओं ने बताया कि वे वर्षों से यह परंपरा निभा रही हैं। उनका कहना है कि मां अंगारमोती माता सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
भिलाई से पहुंची मीनाक्षी साहू ने कहा, “यह सबकी अपनी-अपनी श्रद्धा का विषय है। जो लोग इसे नहीं मानते, उनके लिए यह अंधविश्वास हो सकता है, लेकिन हमारे लिए यह मां के प्रति आस्था का प्रतीक है।”


