पिथौरा(जीतयादव)।प्रदेश की तेंदूपत्ता व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह प्रभावित हो गई है, क्योंकि लघु वनोपज प्रबंधकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है। 22 अप्रैल से शुरू हुई इस हड़ताल का असर अब साफ दिखाई देने लगा है और लाखों संग्राहक परिवारों की आजीविका संकट में आ गई है।
तेंदूपत्ता प्रबंधकों की हड़ताल के कारण 95% फड़ों में नहीं शुरू हो पाया संग्रहण।
हड़ताल के चलते राज्य के 902 प्रबंधक काम से दूर हैं, जिससे लगभग 14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार और 65 लाख से अधिक ग्रामीण सीधे प्रभावित हो रहे हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण लगभग ठप पड़ गया है और 95 प्रतिशत फड़ों में अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने कहा कि वर्षों से लंबित मांगों को लेकर बार-बार शासन को अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब प्रबंधक अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं और समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
संघ की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन मैट्रिक्स लेवल 07, 08 और 09 लागू करना, पेंशन, सेवा सुरक्षा, अनुकंपा नियुक्ति और लंबित भुगतान शामिल हैं। प्रबंधकों का कहना है कि वे पिछले कई दशकों से वनांचल क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संग्रहण और अन्य वनोपज कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पाई हैं।
हड़ताल का असर महासमुंद जिले में भी देखने को मिल रहा है, जहां 1 मई से तेंदूपत्ता खरीदी शुरू होनी थी। अब जिले के करीब 1 लाख ग्रामीण परिवारों पर आर्थिक संकट मंडराने लगा है। यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

संघ ने इस स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए चेतावनी दी है कि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र हो सकता है। फिलहाल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लाखों परिवारों की आजीविका इस हड़ताल के कारण प्रभावित होती नजर आ रही है।



