बसना(जीतयादव)।प्रशासन द्वारा गांव-गांव लगाए जा रहे “सुशासन शिविर” को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। पिछले वर्ष जिस “सुशासन” का दावा किया गया था, वह जमीनी स्तर पर पूरी तरह सफल नहीं दिखा। अब फिर से शिविर आयोजित करने की तैयारी के बीच लोगों में संशय बना हुआ है कि क्या इस बार वास्तव में समस्याओं का समाधान होगा या यह केवल कागजी प्रक्रिया बनकर रह जाएगा।
“सुशासन शिविर” में पिछली बार जैसे हालात दोहराने की आशंका, मोक्ष कुमार प्रधान ने बताया महज़ खानापूर्ति।
ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर इन शिविरों में पहुंचते हैं। तेज गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्हें उम्मीद रहती है कि वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान मिलेगा। लेकिन कई मामलों में देखा गया कि शिविर समाप्त होते ही फाइलों में समाधान दिखा दिया जाता है और ऑनलाइन पोर्टल में “निराकृत” दर्ज कर दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।
पिछले वर्ष भी ऐसे कई प्रकरण सामने आए, जहां आवेदकों ने पूरी प्रक्रिया अपनाई, आवेदन दिए और अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन वास्तविक समाधान नहीं हो सका। कई लोगों को यह तक जानकारी नहीं हो पाई कि उनकी समस्या को सिस्टम में “सुलझा हुआ” दिखा दिया गया है।

इस मुद्दे पर बसना विधानसभा के कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिना वास्तविक समाधान के ऐसे शिविर महज़ औपचारिकता बनकर रह जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन आंकड़ों और रिपोर्ट को बेहतर दिखाने में ज्यादा ध्यान दे रहा है, जबकि आम नागरिक अभी भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि सुशासन का अर्थ केवल शिविर आयोजित करना नहीं, बल्कि हर समस्या का ईमानदारी से समाधान करना है। यदि केवल कागजों में कार्यवाही दिखाकर जिम्मेदारी पूरी मानी जाती है, तो यह व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।अब देखना यह होगा कि इस बार प्रशासन इन चिंताओं को दूर कर वास्तविक सुधार करता है या फिर पूर्व की तरह ही व्यवस्थाएं केवल औपचारिकता तक सीमित रह जाती हैं।




