बसना। अरेकेल स्कूल में विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम्स और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों का जायजा लेने के लिए विकासखंड स्रोत केंद्र समन्वयक (बीआरसी) अनिल सिंह साव ने शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अरेकेल का निरीक्षण किया। समग्र शिक्षा जिला परियोजना कार्यालय, महासमुंद के निर्देशानुसार किए गए इस निरीक्षण में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर, कक्षा में संचालित शिक्षण गतिविधियों और नवाचारी शिक्षण पद्धतियों का अवलोकन किया गया। इस दौरान संकुल समन्वयक गजेन्द्र नायक और वारिस कुमार उपस्थित रहे।
शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अरेकेल का किया निरीक्षण, प्रयास और NMMS जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों का लिया जायजा।
निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों के विषयगत ज्ञान, तार्किक चिंतन, प्रश्नों के उत्तर देने की क्षमता और कक्षा में सहभागिता पर ध्यान दिया गया। बीआरसी ने शिक्षण प्रक्रिया का जायजा लेते हुए यह देखा कि विद्यार्थियों को विषयों की अवधारणाएं कितनी सरलता और प्रभावी तरीके से समझाई जा रही हैं। साथ ही बच्चों को प्रश्न पूछने, अपने विचार रखने और गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर देने पर जोर दिया गया।
अरेकेल विद्यालय में शिक्षक प्रेमचन्द साव सहित शिक्षकों द्वारा अपनाई जा रही नवाचारी शिक्षण पद्धतियों का भी अवलोकन किया गया। विद्यालय में संचालित ‘विज्ञान का पिटारा’ और ‘विज्ञान कॉर्नर’ के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रयोगों, मॉडल और स्थानीय संसाधनों की मदद से विज्ञान की अवधारणाएं समझने का अवसर मिल रहा है। गतिविधि आधारित शिक्षण और खेल-खेल में पढ़ाई से बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा और राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति परीक्षा (NMMS) की तैयारियों का भी जायजा लिया गया। इन परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास, विषयों की स्पष्ट समझ और तार्किक क्षमता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।
निरीक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों के निर्धारित अधिगम प्रतिफलों की उपलब्धि सुनिश्चित करना और शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। विद्यालय में संचालित नवाचारों और प्रयोग आधारित गतिविधियों से विद्यार्थियों को सीखने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।


