बसना। संस्कार साहित्य मंच के तत्वावधान में रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को ग्राम सिंघनपुर स्थित भक्त माता कर्मा मंदिर में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों और कवियों ने अपनी स्वरचित रचनाओं के माध्यम से सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं, भारतीय संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति से जुड़े विभिन्न विषयों को प्रस्तुत किया। कविताओं ने श्रोताओं को भावविभोर किया और साहित्यिक वातावरण को उत्साहपूर्ण बना दिया।
भक्त माता कर्मा मंदिर सिंघनपुर में साहित्यकारों ने सुनाईं स्वरचित कविताएं, साहित्य और संस्कृति की सामाजिक भूमिका पर हुआ विचार-विमर्श।
काव्य गोष्ठी का उद्देश्य साहित्य, कविता और काव्य कला को प्रोत्साहित करने के साथ साहित्यकारों के बीच संवाद तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना रहा। उपस्थित कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए जीवन के विविध पहलुओं को सामने रखा। साहित्यप्रेमियों ने कविताओं की सराहना करते हुए रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर साहित्य की सामाजिक भूमिका और वर्तमान समय में साहित्यकारों के दायित्वों पर भी चर्चा हुई। मंच के उपाध्यक्ष डिजेन्द्र कुर्रे ‘कोहिनूर’ ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। यह सामाजिक विसंगतियों को उजागर करने के साथ सकारात्मक सोच, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का काम करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नवोदित रचनाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देते हैं और साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम में मंच के संस्थापक धनीराम नंद, अध्यक्ष सुकमोती चौहान ‘रुचि’, उपाध्यक्ष डिजेन्द्र कुर्रे ‘कोहिनूर’, सचिव मानक मगन, कोषाध्यक्ष गोकुलानंद ‘चुलबुला’, सहसचिव सुंदर डडसेना ‘मधुर’, गजलकार परशुराम चौहान ‘गीतासागर’, सरमुन खान ‘नूरी’, खीरसिंधु साहू, रुपलता कुर्रे और जिज्ञासा कुर्रे सहित अन्य साहित्यकार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में साहित्यकारों ने साहित्य सेवा, रचनात्मक सृजन और सामाजिक जागरूकता के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया। सिंघनपुर में गोष्ठी ने साहित्यिक एकता, आपसी आत्मीयता और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने का संदेश दिया।


