बसना(जीतयादव)। जनपद पंचायत बसना में मनरेगा और ग्रामीण विकास से जुड़े निर्माण कार्यों की तकनीकी जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मनरेगा तकनीकी सहायक संदीप कुमार के जिम्मे 57 ग्राम पंचायतों की तकनीकी जिम्मेदारी है। वहीं अन्य तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच पंचायतों का कार्यभार अलग-अलग संख्या में वितरित किया गया है।
जनपद पंचायत बसना में तकनीकी जिम्मेदारियों के आवंटन को लेकर चर्चा तेज, निगरानी व्यवस्था और कार्यभार के संतुलन पर उठ रहे सवाल।
जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत बसना के अंतर्गत कुल 102 ग्राम पंचायतें आती हैं। इनमें संदीप कुमार, मनरेगा तकनीकी सहायक को 57 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं जयानंद श्रीवास, उप अभियंता (ग्रामीण यांत्रिक सेवा) को 24 ग्राम पंचायतों का तकनीकी दायित्व सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा सुंदरलाल, मनरेगा तकनीकी सहायक के पास 12 पंचायतें तथा रानी राय, मनरेगा तकनीकी सहायक के पास 9 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी बताई गई है।वहीं उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्नेहा पटेला को 12, तमेश ध्रुव को 14, अंकित गुप्ता को 15, सहायक पटेल को 15, ज्योति नाग को 12, पूर्णिमा ठाकुर को 11 तथा रमा साहू को 12 ग्राम पंचायतों का दायित्व दिया गया है।
इसी क्रम में जनपद पंचायत बसना के विष्णु नारायण सिंह राठौर, उप अभियंता (ग्रामीण यांत्रिक सेवा) का नाम भी तकनीकी अमले में शामिल है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके जिम्मे किसी ग्राम पंचायत का आवंटन नहीं किया गया है।
57 पंचायतों की जिम्मेदारी बनी चर्चा का विषय
सबसे अधिक चर्चा मनरेगा तकनीकी सहायक संदीप कुमार को दी गई 57 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी को लेकर हो रही है। सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में पंचायतों में संचालित मनरेगा एवं अन्य निर्माण कार्यों का नियमित स्थल निरीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और गुणवत्ता की निगरानी किस तरह प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जा सकेगी।
मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नाली, पुल-पुलिया, आंगनबाड़ी भवन, सामुदायिक भवन, स्टॉप डैम और अमृत सरोवर सहित कई विकास कार्य कराए जाते हैं। इन कार्यों की तकनीकी जांच, स्थल निरीक्षण और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में तकनीकी अमले की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
ऐसे में एक ही तकनीकी सहायक के पास बड़ी संख्या में पंचायतों की जिम्मेदारी और दूसरी ओर कुछ तकनीकी अधिकारियों के पास कम अथवा किसी पंचायत का आवंटन नहीं होने की स्थिति को लेकर कार्यभार के संतुलन और तकनीकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, पंचायतों के बीच तकनीकी जिम्मेदारियों का आवंटन प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया जाता है। इस पूरे मामले में संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना होगा कि क्या जिम्मेदारियों के इस बंटवारे की प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की जाती है और क्या सभी पंचायतों में निर्माण कार्यों की प्रभावी तकनीकी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कार्यभार को संतुलित किया जाता है।
ग्रामीणों की अपेक्षा है कि जनपद पंचायत बसना में मनरेगा सहित सभी विकास कार्यों की समय पर तकनीकी जांच, नियमित स्थल निरीक्षण और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित हो, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच सके।


