बसना(जीतयादव)।शासकीय उच्च प्राथमिक शाला साल्हेतराई में प्रधान पाठक श्री अयोध्या प्रसाद मिश्रा के सेवानिवृत्ति अवसर पर आयोजित विदाई समारोह भावुकता और सम्मान का अनूठा उदाहरण बन गया। इस आयोजन ने न केवल छात्रों की आंखें नम कर दीं, बल्कि पूरे गांव को एक सूत्र में बांध दिया।
साल्हेतराई में शिक्षक अयोध्या प्रसाद मिश्रा 33 वर्षों की सेवा के बाद भावुक विदाई, नगर भ्रमण में उमड़ा ग्रामीणों का स्नेह।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की पूजा-अर्चना से हुई। शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री रामलाल मलिक एवं श्री परमानंद पंडा ने मिश्रा जी के 33 वर्षों के सफल शिक्षकीय जीवन पर प्रकाश डालते हुए विदाई गीत के माध्यम से कृतज्ञता व्यक्त की। इस दौरान शाला परिवार, पंचायत एवं संकुल केंद्र की ओर से उन्हें शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
साल्हेतराई गांव के सरपंच प्रतिनिधि श्री कमल नयन प्रधान ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक केवल विद्यालय का नहीं, बल्कि पूरे समाज का मार्गदर्शक होता है। उन्होंने कहा कि अयोध्या प्रसाद मिश्रा ने गांव की कई पीढ़ियों को शिक्षित कर समाज को नई दिशा दी है।
समारोह की सबसे विशेष झलक नगर भ्रमण रही, जहां ग्रामीणों ने पूरे सम्मान के साथ मिश्रा जी को गांव में घुमाया। जगह-जगह लोगों ने उनके चरण पखारकर फूलों की वर्षा की और श्रीफल भेंट किया। ढोल-नगाड़ों और कीर्तन मंडली के साथ निकले इस जुलूस ने शिक्षक के प्रति ग्रामीणों के प्रेम और सम्मान को जीवंत कर दिया।
अपने विदाई संबोधन में भावुक हुए श्री अयोध्या प्रसाद मिश्रा ने कहा कि उन्होंने केवल अपना कर्तव्य निभाया है, लेकिन गांव से मिला यह स्नेह उनके जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार है।
इस अवसर पर प्राचार्य श्री महेश राम साव, संकुल समन्वयक श्री छत्र कुमार राणा, शाला के व्याख्याता एवं शिक्षकगण जगबंधु तांडी, हितेश कुमार मिश्रा, सत्येंद्र पाल, लिलेश्वरी साहू, नीरा ठाकुर, खिरकुमारी पटेल, कामायनी पंडा, डालिम बूड़ेक, राधेश्याम साहू, गुरुमसिंह सोना, देवनारायण साहू, वेणुधर पटेल, वीरेन्द्र साहू, मिथलेश सिन्हा, मोती यादव, ममता पटेल, बुद्धदेव चौधरी, हरिता चौधरी, संध्या सिदार, द्रौपदी साहू, घनश्याम पटेल, सुमित्रा बंजारा सहित बड़ी संख्या में साल्हेतराई गांव के ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन श्री कमल नयन प्रधान ने किया, जबकि अंत में आभार प्रदर्शन प्राचार्य श्री महेश राम साव द्वारा किया गया।यह आयोजन इस बात का जीवंत उदाहरण बन गया कि सच्चे शिक्षक की पहचान केवल उसके पद से नहीं, बल्कि समाज में मिले सम्मान और स्नेह से होती है।



