कोमाखान। कोमाखान सर्किल के कारीपाट पहाड़ जंगल में शनिवार सुबह लकड़ी बीनने गए एक ग्रामीण पर तेंदुए ने हमला कर दिया। अचानक हुए हमले के बावजूद पंडरीपानी निवासी लक्ष्मीचंद यादव ने हिम्मत नहीं हारी और हाथ में मौजूद कुल्हाड़ी से तेंदुए का सामना किया। ग्रामीण के लगातार बचाव करने और कुल्हाड़ी चलाने के बाद तेंदुआ जंगल की ओर भाग गया। हमले में लक्ष्मीचंद गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कोमाखान के कारीपाट जंगल में दो बार झपटा तेंदुआ, लक्ष्मीचंद यादव ने हिम्मत दिखाकर किया बचाव; ग्रामीणों ने गश्त बढ़ाने की मांग की।
जानकारी के अनुसार, घटना शनिवार सुबह करीब 10 बजे भलेसर बीट के कक्ष क्रमांक 109 में हुई। लक्ष्मीचंद जंगल में लकड़ी एकत्र कर रहे थे, तभी झाड़ियों में छिपे तेंदुए ने अचानक उन पर झपट्टा मार दिया। उन्होंने तत्काल कुल्हाड़ी से अपना बचाव किया, जिसके बाद तेंदुआ कुछ पीछे हटा। हालांकि कुछ देर बाद उसने दोबारा हमला किया। इस बार भी लक्ष्मीचंद ने कुल्हाड़ी से मुकाबला किया, जिसके बाद तेंदुआ वहां से भाग निकला।
हमले में ग्रामीण के शरीर पर पंजों के पांच गहरे घाव और कई खरोंचें आई हैं। परिजनों और ग्रामीणों ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया। कोमाखान वन परिक्षेत्र के डिप्टी रेंजर दुलार सिंह सिन्हा ने बताया कि घटना कारीपाट पहाड़ के जंगल में हुई है। वन विभाग की ओर से घायल ग्रामीण को ₹1,000 की तत्काल आर्थिक सहायता दी गई है।
ग्रामीणों ने गश्त और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग की
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी के बावजूद जंगल जाने वाले रास्तों पर चेतावनी बोर्ड या बैनर नहीं लगाए गए हैं। ग्रामीण चैतराम पांडेय के अनुसार, करीब छह महीने पहले तेंदुए ने उनकी गाय के दो बछड़ों को मार दिया था। पिछले साल एक सफेद घोड़े पर भी हमला होने की बात सामने आई थी।
ग्रामीणों के मुताबिक भलेसर और नर्रा बीट के करीब 10 किलोमीटर के दायरे में तेंदुए की गतिविधियां लंबे समय से देखी जा रही हैं। पंडरीपानी, झिटकी, नवाडीही, खुरदा सहित आसपास के ग्रामीणों ने वन विभाग से जंगल में गश्त बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग की है।


