महासमुंद(जीतयादव)। जिले में जब्त एलपीजी गैस कैप्सूल से LPG गैस गबन मामले में बड़ा खुलासा करते हुए महासमुंद पुलिस ने जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को पूरे षड्यंत्र का मुख्य आरोपी बताया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि करीब डेढ़ करोड़ रुपये कीमत की एलपीजी गैस के गबन की योजना खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर ने मिलकर बनाई थी।
LPG कैप्सूल से करोड़ों की गैस हेराफेरी मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार।
जांच में सामने आया कि खाद्य अधिकारी अजय यादव, गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर निवासी मनीष चौधरी ने मिलकर पूरी योजना तैयार की। मनीष चौधरी को उपयुक्त एजेंसी तलाशने और सौदेबाजी की जिम्मेदारी दी गई थी। कई एजेंसियों से बातचीत के बाद ठाकुर पेट्रोकेमिकल के साथ 80 लाख रुपये में डील तय हुई।
पुलिस के मुताबिक 26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर सिंघोड़ा थाना पहुंचे और छह LPG गैस कैप्सूल में उपलब्ध गैस का आकलन किया। जांच में करीब 102 से 105 मीट्रिक टन गैस होने का अनुमान लगाया गया। इसके बाद गैस गबन कर एक करोड़ रुपये उगाही की योजना बनाई गई।
आरोप है कि सुपुर्दनामा प्रक्रिया के दौरान खाद्य विभाग के कर्मचारियों को दस्तावेजों में हस्ताक्षर नहीं करने और LPG गैस कैप्सूल का वास्तविक वजन नहीं कराने के निर्देश दिए गए। पुलिस का दावा है कि सुपुर्दनामा के बाद एक सप्ताह के भीतर करीब 92 टन गैस निकाल ली गई और बाद में फर्जी पंचनामा तैयार कर कलेक्टोरेट में जमा कराया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि सौदे के तहत 80 लाख रुपये में से 50 लाख रुपये खाद्य अधिकारी अजय यादव को दिए गए थे। जबकि पंकज चंद्राकर और मनीष चौधरी को क्रमशः 20 लाख और 10 लाख रुपये मिलने थे।
मामले में पुलिस ने पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और अजय कुमार यादव को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल, नगदी और अन्य सामान सहित करीब 6 लाख 11 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।



