पिथौरा(जीतयादव)।प्रदेशभर में तेंदूपत्ता व्यवस्था पर बड़ा संकट गहराता जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक संघ के आह्वान पर 22 अप्रैल 2026 से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल अब चौथे दिन में प्रवेश कर चुकी है। इसका असर सीधे लाखों संग्राहक परिवारों की आजीविका पर पड़ने लगा है।
14 लाख परिवारों पर संकट, 38 साल से लंबित मांगों को लेकर तेंदूपत्ता प्रबंधकों का उग्र आंदोलन।
हड़ताल के चलते प्रदेश के करीब 14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार और 65 लाख से अधिक संग्राहकों पर आर्थिक संकट मंडरा रहा है। करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है, वहीं 95% फड़ों में अब तक संग्रहण शुरू नहीं हो सका है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
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प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने आरोप लगाया कि पिछले 38 वर्षों से प्रबंधक वनांचल क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा, वेतनमान, पेंशन और मेडिकल सुविधाएं नहीं मिलीं। कई बार ज्ञापन देने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं होने से अब प्रबंधक आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
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संघ की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन मैट्रिक्स लेवल 07, 08 और 09 लागू करना, सेवा सुरक्षा, पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति और लंबित भुगतान शामिल हैं। हड़ताल के कारण तेंदूपत्ता संग्रहण के साथ 67 प्रकार के लघु वनोपज की खरीदी, बोनस और बीमा योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ रहा है।



