महासमुंद। शांत्रीबाई कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय के बी.ए. प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत जेनेरिक इलेक्टिव कोर्स (वनस्पतिशास्त्र) में औषधीय पौधों का विशेष संग्रहण कार्य किया। इस दौरान वनस्पतिशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापकों ने विद्यार्थियों को नासा द्वारा प्रमाणित एवं सत्यापित औषधीय पौधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में छात्रों ने स्नैक प्लांट, स्पाइडर प्लांट, पोथस प्लांट और एलोवेरा जैसे औषधीय पौधों का संग्रहण कर उनके गुणों एवं उपयोगों का अध्ययन किया।
स्नैक प्लांट को हवा से बेंजीन, फार्मेल्डिहाइड और जाइलीन जैसे विषैले तत्वों को हटाने में प्रभावी बताया गया। यह पौधा वायु शुद्धिकरण, ऑक्सीजन उत्पादन और मानसिक स्वास्थ्य सुधार में सहायक माना जाता है।
इसी तरह स्पाइडर प्लांट हवा में नमी बढ़ाकर वातावरण को शुद्ध करता है तथा कार्बन मोनोऑक्साइड, जाइलीन, फार्मेल्डिहाइड और टोल्विन जैसे हानिकारक रसायनों को निष्क्रिय करने में सहायक है।
पोथस प्लांट को प्राकृतिक वायु शोधक के रूप में जाना जाता है, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट, जीवाणुरोधी, एंटीफंगल, एंटी-डायबिटिक, घाव भरने वाले और कैंसर विरोधी गुण पाए जाते हैं।
एलोवेरा प्लांट, जिसे बर्न प्लांट, लिली ऑफ डेजर्ट और एलिफेंट गाल के नाम से भी जाना जाता है, को विद्यार्थियों ने सबसे उपयोगी औषधीय पौधा बताया। इसकी पत्तियों में पाया जाने वाला पारदर्शी जेल 96 प्रतिशत पानी से बना होता है, जिसमें 18 से 20 अमीनो एसिड, विटामिन A, B, C, E और कई कार्बनिक-अकार्बनिक यौगिक शामिल होते हैं। एलोवेरा का उपयोग जलन, घाव, मुंहासे, पाचन समस्या और रक्त शर्करा नियंत्रण में किया जाता है।
कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को सभी पौधों के बारे में क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल जानकारी प्रदान की गई। इसके अलावा छात्रों ने एक संग्रह पुस्तिका तैयार कर महाविद्यालय ग्रंथालय में रखी, जिसमें प्रत्येक पौधे का स्थानीय नाम, वानस्पतिक नाम एवं औषधीय उपयोग विस्तार से उल्लेखित है।
इस पहल की सराहना करते हुए शिक्षकों ने कहा कि ऐसे अध्ययन से विद्यार्थी न केवल वनस्पतियों की उपयोगिता समझते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी जागरूकता फैलाते हैं।

