सरायपाली(जीतयादव)। नाबालिग पीड़िता के दैहिक शोषण और अश्लील वीडियो वायरल करने के मामले में विशेष न्यायालय पॉक्सो सरायपाली ने आरोपी दीपक देवांगन, निवासी भंवरपुर, तहसील बसना को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है। न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ विभिन्न धाराओं में कुल 4 लाख 90 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
पॉक्सो कोर्ट सरायपाली का सख्त फैसला, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी दोषी; कुल 4.90 लाख रुपये का अर्थदंड।
मामले में पुलिस द्वारा जुटाए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, गवाहों के बयान तथा व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम पर प्रसारित वीडियो से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना गया। पुलिस के अनुसार वीडियो की जांच प्रोसेसिंग प्रयोगशाला से कराई गई थी, जिसके बाद अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए।
मामले के अनुसार पीड़िता ने थाना बसना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी करीब तीन वर्ष पहले उसका मोबाइल नंबर लेकर व्हाट्सऐप और फोन के माध्यम से बातचीत करता था। आरोप है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता को बहला-फुसलाया और धमकी देकर उसके साथ दैहिक शोषण किया।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने घटना का वीडियो अपने मोबाइल में बना लिया था। आरोप है कि बाद में इसी वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता को डराया-धमकाया गया और उसके साथ बार-बार जबरदस्ती की गई। पीड़िता द्वारा आरोपी से मिलने से इनकार करने के बाद अश्लील वीडियो को व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम पर वायरल किए जाने की शिकायत सामने आई।
परिजनों की शिकायत के आधार पर थाना बसना में 22 अप्रैल 2025 को अपराध क्रमांक 167/2025 दर्ज किया गया था। मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ पॉक्सो अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराएं लगाई गई थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसडीओपी सरायपाली श्रीमती ललिता मेहर ने स्वयं विवेचना की। पुलिस ने गवाहों के बयान दर्ज करने के साथ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए और व्हाट्सऐप एवं इंस्टाग्राम से जुड़े वीडियो की तकनीकी जांच कराई। इसके बाद निर्धारित समय में चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय सरायपाली ने सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी माना। पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास, भारतीय दंड संहिता की धारा 449 के तहत 10 वर्ष, धारा 506 भाग-2 के तहत 3 वर्ष और धारा 509 के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास सहित सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं में भी सजा सुनाई गई।
आईटी एक्ट की धारा 67 में 3 वर्ष का कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 67(क) में 3 वर्ष का कारावास और 2 लाख रुपये तथा धारा 67(ख) में 3 वर्ष का कारावास और 2 लाख रुपये अर्थदंड लगाया गया। विभिन्न अपराधों में कुल 4 लाख 90 हजार रुपये का अर्थदंड निर्धारित किया गया।
प्रकरण की विवेचना तत्कालीन एसडीओपी सरायपाली श्रीमती ललिता मेहर द्वारा की गई थी। चालान पेश होने के बाद भी प्रकरण की ट्रायल मॉनिटरिंग जारी रखी गई। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक लोचन प्रसाद साहू एवं वनस्वरूप सेन ने पैरवी की।


