महासमुंद(जीतयादव)। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की है। संघ के आह्वान पर 17 अगस्त को काम बंद-कलम बंद आंदोलन करते हुए प्रशिक्षकों ने सरकार से 16 सूत्रीय मांगों के जल्द निराकरण की गुहार लगाई।
1,029 प्रशिक्षकों का मानदेय लंबित, 38,100 रुपये मासिक मानदेय और सेवा सुरक्षा समेत कई मांगें; कलेक्टर ने समाधान का दिया आश्वासन।
प्रदेश के करीब 1,285 सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न रोजगारपरक ट्रेड का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षकों का कहना है कि वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें नियमित सेवा व्यवस्था और समय पर मानदेय का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि मानदेय में देरी के कारण कई प्रशिक्षक आर्थिक परेशानियों और कर्ज की स्थिति से जूझ रहे हैं।
1,029 प्रशिक्षकों का मानदेय लंबित
प्रशिक्षक संघ के अनुसार करीब 1,029 प्रशिक्षकों का मई-जून का मानदेय लंबित है। वहीं PAB 2025-26 के अनुसार स्वीकृत 12 हजार रुपये एरियर्स के भुगतान की मांग भी उठाई गई है। इसके अलावा 121 हेल्थ केयर ट्रेड प्रशिक्षकों के मानदेय को बढ़ाकर 23 हजार रुपये करने की मांग रखी गई है।
38,100 रुपये मानदेय और सेवा सुरक्षा की मांग
प्रमुख मांगों में हरियाणा और दिल्ली की तर्ज पर 38,100 रुपये प्रतिमाह मानदेय तथा प्रत्येक वर्ष वेतन वृद्धि का प्रावधान शामिल है। प्रशिक्षकों ने तृतीय पक्ष कंपनी व्यवस्था समाप्त कर विभागीय व्यवस्था में शामिल करने, सेवा सुरक्षा देने, नियमित नियुक्ति, अवकाश की सुविधा और समय पर मानदेय भुगतान की मांग भी रखी है।
कलेक्टर ने दिया समाधान का आश्वासन
प्रशिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह से मुलाकात की। कलेक्टर ने समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया। साथ ही वेतन वृद्धि और नवीन व्यावसायिक शिक्षक भर्ती के संबंध में आयुक्त को पत्र लिखने की बात कही।
इसके बाद संघ की ओर से शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भी ज्ञापन सौंपा गया। डीईओ देवांगन ने प्रशिक्षक संघ की मांगों को रायपुर आयुक्त के समक्ष रखने तथा आवश्यक पत्राचार और चर्चा करने का आश्वासन दिया।


