बसना। वाहिद खान बसना कस्बे के एक ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिनका जीवन संघर्ष, साहस और निःस्वार्थ सेवा की मिसाल है। मध्यम मुस्लिम परिवार से संबंध रखने वाले वाहिद खान मानते हैं कि“जब तक जीवन है, मानव सेवा ही मेरा धर्म और कर्तव्य रहेगा।”
इसी सोच के साथ वे लंबे समय से समाज के बीच निरंतर सेवा कार्य करते आ रहे हैं।
हर महीने अस्पताल में मरीजों के बीच सेवा—सीजन आइटम, फल और भोजन का वितरण
(1) 3 अक्टूबर 2025 से वे प्रति माह बसना के बड़े शासकीय अस्पताल पहुँचकर
मरीजों को ताज़ा फल,
भरपेट भोजन,
गरम ऊनी कंबल (ठंड के मौसम में)
वितरित कर रहे हैं।
(2) 4 नवंबर (3) 5 दिसंबर को भी उन्होंने अस्पताल प्रबंधन की निगरानी में 30–35 भर्ती मरीजों को ऊनी कंबल और उनके सहयोगियों को दोपहर का सादा भोजन उपलब्ध कराया।
चालीस वर्षों से नशा-निरोध और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान
वाहिद खान पिछले 40 वर्षों से नशा से दूर रहने और नशा मुक्त जीवन जीने की सलाह देते हुए युवाओं को रोजगार के लिए प्रेरित करते आ रहे हैं। वे कई बेरोजगार युवाओं को ब्रिज दास मानिकपुरी के सहयोग से मार्गदर्शन देकर रोजगार से जोड़ चुके हैं।
छोटे व्यवसाय,
हुनर आधारित प्रशिक्षण,
स्व-रोजगार
के प्रति मार्गदर्शन देकर आत्मनिर्भर बना चुके हैं।
छोटा हाथी चलाकर जीविका, पर दिल में अपार सेवा भावना
वाहिद खान जीविका के लिए छोटा हाथी (लोड वाहन) चलाते हैं। आर्थिक रूप से सीमित साधनों के बावजूद उनमें समाज सेवा की गहरी भावना है।
वे अपने वाहन से—
अस्पताल में मृत्यु होने पर शव को मुक्तिधाम तक न्यूनतम शुल्क में पहुँचाते हैं,
ताकि परिजन आर्थिक बोझ से बच सकें।
बसना बसस्टैंड टैक्सी यूनियन से जुड़े रहते हुए उन्होंने
यात्रियों के लिए शौचालय निर्माण
में भी सहयोग किया था, जब बसना नगरीय निकाय नहीं बल्कि ग्राम पंचायत था।
गर्मी में ठंडा पानी सेवा—मुसाफिरों और राहगीरों के लिए सालों से व्यवस्था
हर वर्ष गर्मी के मौसम में बसना बसस्टैंड में वे
ठंडा पेयजल,
शीतल पेय
राहगीरों और यात्रियों के लिए उपलब्ध कराते हैं।
समाज सेवा—समानता, सहानुभूति और सहयोग का भाव
वाहिद खान कहते हैं—
“समाज सेवा केवल मदद नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें नई दिशा देना है।”
उनकी सेवाएँ सामाजिक समानता और भाईचारे को बढ़ावा देती हैं।
वह निशक्तजनों, गरीबों और उपेक्षित परिवारों को निरंतर सहायता करते रहते हैं।






