बसना। शासकीय हाई स्कूल बड़े टेमरी में विकासखंड स्तरीय पांच दिवसीय नवीन पाठ्य-पुस्तक आधारित शिक्षक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा महासमुंद रेखराज शर्मा के निर्देशानुसार, एपीसी संपा बोस, विकासखंड शिक्षा अधिकारी बद्री विशाल जोल्हे एवं विकासखंड स्रोत केंद्र समन्वयक अनिल सिंह साव के मार्गदर्शन में यह प्रशिक्षण कक्षा छठवीं के नवीन पाठ्य-पुस्तकों पर आधारित संस्कृत (दीपकम्) एवं सामाजिक विज्ञान विषय का अध्यापन कराने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए आयोजित किया गया।

संस्कृत एवं सामाजिक विज्ञान अध्यापन कराने वाले शिक्षक नवीन पाठ्य-पुस्तक आधारित प्रशिक्षण पर हुए प्रशिक्षित
नवीन पाठ्य-पुस्तक आधारित प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना, उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाना रहा। प्रशिक्षण में बीआरजी छबिमन्यु सढंगी, गिरीश कुमार पाढ़ी, श्याम लाल सिदार, वेद कुमार साव एवं एफएलएन विकासखंड नोडल शरण कुमार दास द्वारा एनईपी 2020 की संरचना, समग्र विकास, कला शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल बोध, विषयों का अंतर्संबंध, समूह शिक्षण, ब्लूम टैक्सोनॉमी, सीखने के प्रतिफल, ब्लू-प्रिंट के आधार पर प्रश्न पत्र निर्माण, गतिविधि आधारित शिक्षण, आकलन-मूल्यांकन एवं पंचकोश सिद्धांत पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।

इस अवसर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी बद्री विशाल जोल्हे ने कहा—
“राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य ऐसा भारत बनाना है जहाँ हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और वह जिम्मेदार, कुशल एवं जागरूक नागरिक बन सके, जो देश के विकास में सक्रिय योगदान दे।”
विकासखंड स्रोत केंद्र समन्वयक अनिल सिंह साव ने कहा कि नवीन पाठ्य-पुस्तक आधारित प्रशिक्षण शिक्षकों को सशक्त बनाकर छात्रों को आनंददायक, समावेशी एवं समग्र शिक्षा प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा।

संस्कृत विषय के बीआरजी गिरीश कुमार पाढ़ी ने वर्णमाला ज्ञान, लिंग-वचन, पुरुष, अव्यय, प्रत्यय, उपसर्ग, काल व कारक रचना, वाक्य निर्माण, समय-घंटा पढ़ने की विधि तथा नवीन पाठ्य-पुस्तक की पाठ-पठन एवं समझ आधारित वाचन की सरल तकनीकों की जानकारी दी। वहीं बीआरजी छबिमन्यु सढंगी ने संस्कृत भाषा के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं संवैधानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला बताया।

नवीन पाठ्य-पुस्तक आधारित प्रशिक्षण प्रभारी राजेश कुमार भोई ने पंचकोश सिद्धांत—अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय एवं आनंदमय—की व्याख्या की। जिला विज्ञान एवं शैक्षिक परिषद महासमुंद के बसना ब्लॉक नोडल प्रेमचंद साव ने एनईपी, एनसीएफ एवं एससीएफ के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण से शिक्षक नई पाठ्य-पुस्तकों के अनुरूप प्रभावी शिक्षण विधियां अपनाने में सक्षम होंगे।

अनुभवी शिक्षक दुर्गा प्रसाद साहू ने अपने शिक्षण अनुभव साझा किए। प्रशिक्षण में सादराम अजेय, करम सिंह जगत, महेंद्र प्रधान, चंचला सतपथी, निरुपमा विशाल, शिवशोभन सिंह ठाकुर, नेहरू लाल पटेल, रमाकांति दास वैष्णव, अन्नपूर्णा बुड़ेक, मंजुलता प्रधान, रामनाथ साव, झरन सिंह जगत, किरण भोई, हेमंत कुमार दास सहित अनेक शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

नवीन पाठ्य-पुस्तक आधारित प्रशिक्षण के अंत में सभी विषय प्रशिक्षकों को प्रमाण पत्र एवं प्रतीक चिन्ह तथा सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में राजेश कुमार भोई, प्रेमचंद साव एवं शरण कुमार दास का विशेष योगदान रहा। अंत में आभार प्रदर्शन राजेश कुमार भोई द्वारा किया गया।



