बसना। शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के शिक्षाविद सेवा प्रभाग की ओर से बसना सेंटर में “मूल्य आधारित शिक्षा एवं शिक्षक की भूमिका” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों के प्राचार्य, शिक्षक और शिक्षाविद शामिल हुए। परिचर्चा में बदलती शिक्षा व्यवस्था, तकनीक के बढ़ते प्रभाव और विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।
बसना में शिक्षक दिवस पर मूल्य आधारित शिक्षा एवं शिक्षक की भूमिका विषय पर परिचर्चा, शिक्षकों ने चरित्र निर्माण को बताया जरूरी।
कार्यक्रम में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बसना के प्राचार्य नरेंद्र कुमार पंडा, पीएम श्री स्वामी आत्मानंद स्कूल बसना की प्राचार्य गिरिजा साहू, जे मेस स्कूल जगदीशपुर की प्राचार्य सीमा कंवर, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रसोड़ा के प्राचार्य आनंद दास, सरस्वती शिशु मंदिर बसना के प्राचार्य धनुर्जय पटेल, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़े टेमरी के प्राचार्य एच.के. बेहरा, जे मेस स्कूल के शिक्षक तरुण दास, सेवानिवृत्त शिक्षक नंदलाल भोई सहित ब्रह्माकुमारीज बसना सेंटर की संचालिका प्रीति दीदी उपस्थित रहीं।
परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना या जानकारी जुटाना नहीं है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण करना भी है। आज तकनीक और ऑनलाइन शिक्षा ने सीखने के नए रास्ते खोले हैं, लेकिन जीवन में सही निर्णय लेने का विवेक, संवेदनशीलता और मानवीयता केवल तकनीक से विकसित नहीं हो सकती।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि एआई जानकारी उपलब्ध करा सकता है, लेकिन सही-गलत के बीच अंतर समझने और जीवन को सही दिशा देने का विवेक मानवीय मूल्यों और अच्छे मार्गदर्शन से ही विकसित होता है। ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
पीएम श्री स्वामी आत्मानंद स्कूल बसना की प्राचार्य गिरिजा साहू ने कहा कि बच्चे अपने शिक्षकों को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। इसलिए शिक्षक का आचरण विद्यार्थियों के लिए एक उदाहरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुशासन, सकारात्मक सोच और अच्छे व्यवहार को शिक्षक अपने जीवन में अपनाएंगे तो उसका प्रभाव बच्चों पर भी पड़ेगा।


