बसना।विकासखंड स्तरीय ब्लू प्रिंट एवं प्रश्न पत्र निर्माण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन शासकीय हाई स्कूल बड़े टेमरी में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह पाँच दिवसीय प्रशिक्षण विकासखंड शिक्षा अधिकारी बद्री विशाल जोल्हे एवं विकासखंड स्रोत संकुल समन्वयक अनिल सिंह साव के निर्देशन में आयोजित किया गया, जिसमें विकासखंड बसना के विज्ञान संकाय के 74 व्याख्याताओं ने सहभागिता की।
बसना विकासखंड से 74 व्याख्याताओं ने प्राप्त किया पाँच दिवसीय ब्लू प्रिंट एवं प्रश्न निर्माण प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनरों द्वारा निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार प्रतिदिन अलग-अलग विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। इसमें नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020), शिक्षण शास्त्र, लर्निंग आउटकम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विद्यालय संस्कृति, एवं “हमारा विद्यालय कैसा हो” जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। साथ ही सत्र की वार्षिक परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए कक्षा 10वीं एवं 12वीं के लिए विषयवार समूह बनाकर ब्लू प्रिंट एवं प्रश्न पत्र निर्माण का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। विद्यार्थियों के लेखन कौशल आधारित मूल्यांकन पर भी विशेष चर्चा की गई।

इस अवसर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी बद्री विशाल जोल्हे ने व्याख्याताओं को संबोधित करते हुए कहा—
“शिक्षकों को विद्यार्थियों को समझकर, प्रभावी शिक्षण विधियाँ अपनाकर, धैर्य के साथ कौशल एवं दक्षतापूर्ण शिक्षा देनी चाहिए। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कक्षा शिक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है, तभी विद्यालयों में बेहतर परिणाम संभव होंगे।”
विकासखंड स्रोत केंद्र समन्वयक अनिल सिंह साव ने भी सभी व्याख्याताओं को उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्य के लिए प्रेरित किया।
मास्टर ट्रेनर देवराज पाणिग्राही ने शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक, एनसीएफ 2005 में शिक्षक की भूमिका, एनपीएसटी की आवश्यकता, आकलन प्रक्रिया, एवं सीखने के अनुकूल वातावरण पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने ब्लू प्रिंट निर्माण की आवश्यकता, ब्लूम टैक्सोनॉमी के स्तर तथा ब्लू प्रिंट की संरचना को स्पष्ट किया।

गणित विषय के मास्टर ट्रेनर संजय अग्रवाल ने बताया कि गणित न केवल अंकगणितीय कौशल विकसित करता है, बल्कि तर्कशक्ति, रचनात्मक समस्या समाधान और सटीक संप्रेषण क्षमता को भी मजबूत करता है।
रसायन विज्ञान के मास्टर ट्रेनर आलोक कुमार भोई ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत अनुभवात्मक शिक्षण, तकनीक के उपयोग और वास्तविक जीवन से जोड़कर पढ़ाने पर जोर दिया गया है, जिससे विद्यार्थी रटने के बजाय अवधारणाओं को समझ सकें।
विज्ञान मास्टर ट्रेनर शेष नारायण नंदे ने शिक्षकों से विद्यार्थियों में रचनात्मक और आलोचनात्मक सोच विकसित करने का आह्वान किया।

पूरे प्रशिक्षण काल में गणित—संजय अग्रवाल, भौतिकी—देवराज पाणिग्राही, रसायन—आलोक कुमार भोई एवं जीव विज्ञान—शेष नारायण नंदे द्वारा गंभीरता एवं समर्पण के साथ प्रशिक्षण प्रदान किया गया।प्रशिक्षण के समापन अवसर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड स्रोत केंद्र समन्वयक के हाथों सभी प्रतिभागी व्याख्याताओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का सफल संचालन देवराज पाणिग्राही द्वारा किया गया।




