बसना।छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर प्रदेशभर में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। अभ्यर्थियों के बीच कट-ऑफ और चयन प्रक्रिया को लेकर उठ रही शंकाओं ने भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी मुद्दे पर जिला पंचायत सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया लागू करने की मांग की है।
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि वर्तमान में पुलिस आरक्षक भर्ती जारी कट-ऑफ सूची को लेकर अभ्यर्थियों में भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कई युवाओं का आरोप है कि परिणाम जारी करते समय न तो स्पष्टता बरती गई और न ही यह बताया गया कि किस वर्ग में किस अंक पर चयन हुआ है। उन्होंने कहा कि अस्पष्ट कट-ऑफ ने अभ्यर्थियों के बीच अविश्वास पैदा किया है, जिसे सरकार को तत्काल दूर करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार को प्रत्येक वर्ग—जैसे कि सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति आदि—के लिए स्पष्ट व आधिकारिक पुलिस आरक्षक भर्ती कट-ऑफ सूची जारी करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चयन सूची इस तरह प्रकाशित की जाए कि अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रहे, लेकिन यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि किस वर्ग में कितने अंक पर चयन हुआ है। इससे किसी भी प्रकार की अनियमितता, पक्षपात या भ्रम की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।

मोक्ष कुमार प्रधान ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण न्याय सुनिश्चित किया जाए, ताकि सभी वर्गों को समान अवसर और पारदर्शिता का भरोसा मिल सके। उन्होंने कहा कि पुलिस जैसी महत्वपूर्ण सेवा में भर्ती प्रक्रिया व्यवस्थित और विश्वासपूर्ण होनी चाहिए, क्योंकि इससे युवाओं के भविष्य और प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था दोनों जुड़े हुए हैं।

प्रदेशभर में पुलिस आरक्षक भर्ती अभ्यर्थी भी सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों के जरिए अपनी नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं और सरकार से पुलिस भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इन आवाज़ों पर कितना और कैसे संज्ञान लेती है।



