महासमुंद। जिले के विभिन्न थानों और चौकियों में पिछले 13 वर्षों से जब्त अवैध गांजा को अंततः नियमानुसार नष्ट कर दिया गया। जिला स्तरीय ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी की देखरेख में यह कार्रवाई राष्ट्रव्यापी ड्रग निपटान पखवाड़ा के अंतर्गत की गई। कुल 132 प्रकरणों में जब्त 5227.998 किलो यानी करीब 5 टन गांजा का नष्टीकरण किया गया।
महासमुंद में 13 साल से जब्त 5 टन गांजा नष्ट, जिला स्तरीय कमेटी की निगरानी में हुई कार्रवाई।
महासमुंद जिले में वर्ष 2011 से लेकर अब तक गांजा तस्करी और अवैध भंडारण के सैकड़ों प्रकरण दर्ज हुए थे। पुलिस और आबकारी विभाग द्वारा जब्त किए गए इस गांजा को संबंधित थानों और चौकियों में सुरक्षित रखा गया था। लेकिन एनडीपीएस एक्ट के तहत जब्त इन मादक पदार्थों का समय-समय पर नष्टीकरण आवश्यक होता है। इसी कड़ी में इस बार 13 साल पुराने प्रकरणों से लेकर हाल के मामलों तक जब्त किए गए सभी गांजे को एकत्रित कर नियमानुसार नष्ट किया गया।
कहाँ और कैसे हुई कार्रवाई
नष्टीकरण की यह प्रक्रिया ग्राम मूढ़ेना स्थित बाला जी पवार प्लांट में की गई। यहां गांजे को वैज्ञानिक तरीके से जलाकर और प्रोसेस कर पूरी तरह नष्ट किया गया ताकि इसका दुरुपयोग न हो सके। पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक महासमुंद की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी की देखरेख में हुई।

इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और जिला आबकारी अधिकारी भी मौजूद रहे। गांजे को थानों से लाकर प्लांट में रखा गया और फिर भौतिक सत्यापन के बाद उसे नष्ट किया गया।
किन-किन थानों से आया गांजा
थाना सिंघोड़ा : 35 प्रकरण
थाना सरायपाली : 32 प्रकरण
थाना महासमुंद : 6 प्रकरण
थाना बागबाहरा : 5 प्रकरण
इनके अलावा जिले के अन्य थानों और चौकियों में दर्ज मामलों को मिलाकर कुल 132 प्रकरण बने। सभी से प्राप्त गांजे का कुल वजन 5227.998 किलो रहा।
ड्रग निपटान पखवाड़ा के तहत पहल
भारत सरकार के निर्देश पर 16 सितंबर से 30 सितंबर तक राष्ट्रव्यापी ड्रग निपटान पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। इसी के तहत प्रदेश के सभी जिलों में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत जब्त मादक पदार्थों का नष्टीकरण किया जाना है। महासमुंद जिले में यह प्रक्रिया 24, 27 और 29 सितंबर को पूरी की गई।
अधिकारियों की सख्ती
पुलिस अधीक्षक ने साफ किया कि अवैध नशे के कारोबार पर पूरी तरह नकेल कसना पुलिस की प्राथमिकता है। जब्त मादक पदार्थों को सुरक्षित रखने के बाद नियमानुसार उनका समय पर नष्टीकरण करना जरूरी है ताकि अपराधियों को किसी भी प्रकार से इसका लाभ न मिल सके।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जिले में मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। वहीं, जिला आबकारी अधिकारी ने कहा कि समाज को नशे की बुराई से मुक्त कराने में सभी विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं।
अवैध कारोबार पर लगाम
महासमुंद जिला ओडिशा की सीमा से लगा हुआ है, जहां से बड़ी मात्रा में गांजे की तस्करी होती है। इस वजह से यहां लगातार गांजा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है। जब्त गांजे की यह भारी मात्रा इस बात का सबूत है कि पुलिस और अन्य एजेंसियां लगातार अवैध कारोबार पर नजर बनाए हुए हैं।
आगे की रणनीति
जिला पुलिस ने साफ किया है कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सीमावर्ती इलाकों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पुलिस का मानना है कि जब तक सप्लाई चैन पूरी तरह ध्वस्त नहीं होगा, तब तक नशे की समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है।






