बसना(जीतयादव)।ऐतिहासिक एवं पवित्र स्थल गढ़फुलझर स्थित नानकसागर में आयोजित होला मोहल्ला कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर आशीर्वाद लिया तथा विशेष कीर्तन समागम और अरदास में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान सिख समाज की ओर से मुख्यमंत्री का सम्मान करते हुए उन्हें सरोपा भेंट किया गया।
बसना के गढ़फुलझर नानकसागर पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, होला मोहल्ला कार्यक्रम में हुए शामिल।
इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, बसना विधायक संपत अग्रवाल, डॉ. भगवान सिंह खोजी, ज्ञानी हरदीप सिंह, दविंदर सिंह, कमलजीत सिंह, नितिनदीप सिंह, कंवलप्रीत सिंह, अमृतपाल सिंह, देवेंद्र सिंह आनंद, रोमी सलूजा सहित सिख समाज के बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, येत्तराम साहू, अखिलेश सोनी, भूपेंद्र सिंह सवन्नी, इंद्रजीत सिंह गोल्डी, अमरजीत छाबड़ा, सरपंच हरप्रीत कौर, गिरधारी साहू और चतुर्भुज आर्य सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि गढ़फुलझर की पावन भूमि स्थित नानकसागर अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी के चरण पड़े हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संतों और महापुरुषों की तपोभूमि रही है और राज्य सरकार प्रदेश के सभी प्रमुख तीर्थस्थलों के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए लगभग 2.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जा चुकी है और विकास कार्य जारी है।
वहीं बसना विधायक संपत अग्रवाल ने बताया कि गढ़फुलझर में अमृतसर की तर्ज पर एक भव्य गुरुद्वारा बनाने की योजना है, जिससे इस क्षेत्र की धार्मिक आस्था और पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1506 में गुरु नानक देव जी अपनी पहली उदासी के दौरान इस स्थल पर दो दिनों तक ठहरे थे। यह स्थान आज भी “गुरुखाप” के नाम से जाना जाता है। यहां प्राचीन किले, सुरंगों के अवशेष, रनेश्वर रामचंडी मंदिर और बूढ़ादेव मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थल भी मौजूद हैं।
भविष्य में भव्य गुरुधाम के निर्माण और पर्यटन विकास के साथ गढ़फुलझर के नानकसागर क्षेत्र एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में उभरने की संभावना है।



