बसना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान को लेकर बसना विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आखिर भाजपा किससे लोकतंत्र को बचाने और किसकी अराजकता हटाने की बात कर रही है? जब केंद्र में भाजपा की सरकार है और कई राज्यों में भी उसकी सत्ता है, तो फिर लोकतंत्र को खतरा किससे है? भाजपा को अपने अभियान का उद्देश्य जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए।
केंद्र और कई राज्यों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद लोकतंत्र बचाने के लिए अभियान चलाने पर कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल, कहा– पहले जनता को बताए भाजपा अपने नारे का आधार।
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, युवाओं के रोजगार और आम नागरिकों से जुड़े कई मुद्दे हैं। इन पर ठोस जवाब देने के बजाय भाजपा राजनीतिक नारों और आरोप-प्रत्यारोप के सहारे जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल रैली निकालने और नारे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जनता की आवाज सुनना, विपक्ष का सम्मान करना और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखना भी जरूरी है।
उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनावी प्रक्रिया, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर उठाए जा रहे सवालों का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष को इन मुद्दों पर सवाल पूछने का लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी है और लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत है, तो भाजपा को सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए।
प्रधान ने कहा कि सरकार से सवाल पूछना, किसानों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना, युवाओं का रोजगार मांगना और महंगाई के खिलाफ विरोध करना अराजकता नहीं है। लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार की नीतियों की समीक्षा करना और जनता की समस्याओं को सदन से लेकर सड़क तक उठाना है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या बेरोजगार युवाओं का रोजगार मांगना, किसानों का उचित मूल्य और मुआवजा मांगना या महंगाई से परेशान नागरिकों का सरकार से जवाब मांगना अराजकता है? यदि नहीं, तो भाजपा के इस अभियान का निशाना आखिर कौन है?
अंत में मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि लोकतंत्र किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि देश के नागरिकों का अधिकार है। सवाल पूछना लोकतंत्र की ताकत है। भाजपा को नारे लगाने से पहले यह बताना चाहिए कि लोकतंत्र को बचाने की जरूरत क्यों महसूस हुई। जनता केवल राजनीतिक नारे नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और अपने अधिकारों की सुरक्षा चाहती है।


