बसना। सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बसना में रविवार को चतुर्थ आचार्य विकास वर्ग उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ शासकीय प्राथमिक शाला खेमड़ा के वीरेंद्र कर, विद्यालय समिति के व्यवस्थापक धनेश्वर साहू एवं प्रभारी प्रधानाचार्य रीता स्वर्णकार ने मां सरस्वती, ॐ एवं मां भारती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं सरस्वती वंदना के साथ किया।
43 दीदियों और 14 आचार्यों ने लिया प्रशिक्षण, राष्ट्रप्रेम, संस्कार, वैदिक गणित और नई शिक्षा नीति पर सरस्वती शिशु मंदिर बसना में हुआ मार्गदर्शन।
प्रथम कालांश में वीरेंद्र कर ने भारत माता के प्रति श्रद्धा, राष्ट्रप्रेम, सेवा और समर्पण की भावना विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने लव-कुश, ध्रुव एवं प्रहलाद जैसे आदर्श चरित्रों से प्रेरणा लेकर बच्चों में कर्तव्यनिष्ठा और संस्कार विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
उन्होंने बच्चों में आध्यात्मिक चेतना, धर्म एवं संस्कार विकसित करने पर भी बल दिया। साथ ही वैदिक गणित के महत्व को समझाते हुए एकाधिकेन पूर्वेण, निखिलं नवतश्चरमं दशतः एवं ऊर्ध्वतिर्यग्भ्याम् जैसे सूत्रों के माध्यम से गणित को सरल तरीके से समझाया।
द्वितीय कालांश में तेजकुमार साव ने सुर, ताल एवं लय के साथ प्रार्थना का अभ्यास कराया। तृतीय कालांश में प्रधान पाठक भोजराज प्रधान ने सामान्य ज्ञान पर चर्चा की, जबकि चतुर्थ कालांश में मुकुल कनिटकर ने “भारतीय शिक्षा नीति में परिवर्तन—आज की आवश्यकता” विषय पर मार्गदर्शन दिया।
अंतिम चरण में शारीरिक अभ्यास कराया गया। इसके बाद संघ प्रार्थना के साथ प्रशिक्षण वर्ग का समापन हुआ। वर्ग में 43 दीदियों एवं 14 आचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम विद्यालय अध्यक्ष रामचन्द्र अग्रवाल, व्यवस्थापक धनेश्वर साहू एवं धनुर्जय साहू के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


