सरायपाली(जीतयादव)।पझरापाली स्थित नागशक्ति बूढ़ादेव ठाना कांटा पठार में रविवार को आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिला। गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति, छत्तीसगढ़ गोंडवाना संघ जिला इकाई महासमुंद एवं अखिल भारतीय गोंड समाज फुलझर राज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 9वां स्थापना दिवस एवं पंच बूढ़ादेव महापूजन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
नागशक्ति बूढ़ादेव ठाना कांटा पठार पझरापाली में आस्था का महासंगम उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब।
सुबह से प्रारंभ हुआ यह धार्मिक आयोजन देर रात तक चलता रहा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं सामाजिक एकता की कामना की।
कार्यक्रम की शुरुआत गोंडीयन परंपरा के अनुसार पंडा पूजारी सुदर्शन सिंह ठाकुर द्वारा प्रकृति शक्ति पंच बूढ़ादेव एवं गोंडवाना शक्तियों के विधिवत आह्वान एवं पूजा-अर्चना से हुई। महाआरती के साथ पूरे परिसर में जयकारों की गूंज सुनाई दी और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बन गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गरियाबंद जिले के हीराबतर छुरा से पहुंचे दुर्गे दुलेश्वरी दाई कर्मा नर्तक दल ने पारंपरिक नृत्य-गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। ढोल-मांदर की थाप पर कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री भीखम सिंह ठाकुर ने समाज को एकजुट रहकर अपनी परंपरा, संस्कृति और धार्मिक विरासत को सहेजने का संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अजाक्स अध्यक्ष बसना श्री अमृत लाल जगत ने की।

विशिष्ट अतिथियों में देवकी दीवान, पुरुषोत्तम दीवान, नोविना जगत, जगदीश सिदार, अजय जगत, वरुण जगत, भुवनेश्वर नेताम, गणेश सिदार, श्यामाचरण सिदार, क्षेत्रो सिदार, डॉ. नोहर सिंह नेताम, नैन सिंह नेताम, विजेंद्र पारेश्वर सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं समाज प्रमुख उपस्थित रहे। महिला प्रभाग की सहभागिता भी उल्लेखनीय रही।
मंच संचालन राजेन्द्र सिदार एवं शंकर लाल सिदार ने प्रभावशाली ढंग से किया। वहीं छत्तीसगढ़ गोंडवाना संघ के जिलाध्यक्ष दीपक जगत ने अपने संबोधन में समाज को आगामी जनगणना के प्रति जागरूक रहने और अपनी सामाजिक पहचान को मजबूती से दर्ज कराने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में गोकुल पारेश्वर, प्रेम सिंह पोर्ते (शिव), विश्वनाथ हीरा, दीनबंधु नाग, बलदेव हीरा, निमंकर जगत सहित अनेक पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा। आयोजन के दौरान विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और परंपरागत मूल्यों को मजबूत करने का सशक्त संदेश भी देकर गया।




