बसना। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और विकास को लेकर रांची में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच के तत्वावधान में आदिवासी भाषाओं के भारतीय विद्वान पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा की जयंती पर आयोजित समारोह में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने क्षेत्रीय भाषाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और इनके संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया।
जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच ने मनाई डॉ. रामदयाल मुंडा की जयंती; बहुभाषी कविता पाठ और लोकगीतों ने बांधा समां।
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. मसनीद बडाईक रहे, जबकि अध्यक्षता मंच के डॉ. संजय तिर्की ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अमित चौधरी, डॉ. एंथोनी मुंडा, खातिर हेम्ब्रोम और लोरीश गुरूजी मौजूद रहे। मंच की सचिव सुकेशी करमाकर वर्मा ने स्वागत भाषण दिया।
उन्होंने कहा कि जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के लिए डॉ. रामदयाल मुंडा का योगदान हमेशा याद किया जाएगा। कार्यक्रम में अतिथियों ने उनके साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डाला।
लोरीश गुरूजी ने कहा कि नई पीढ़ी को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रभाषाओं के साथ अपनी भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में लेखन और रचनात्मक कार्य करना डॉ. रामदयाल मुंडा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम के दौरान राहुल राय एवं उनकी टीम ने नुक्कड़ नाटिका प्रस्तुत कर डॉ. मुंडा के विचारों को जीवंत किया। इसके बाद दूसरे सत्र में बहुभाषी कविता पाठ और लोकगीत गायन हुआ, जिसमें विभिन्न भाषाओं के 15 रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।कार्यक्रम का संचालन लेबियान मुंडा ने किया, जबकि शिवशंकर उरांव ने आभार व्यक्त किया।


