पिथौरा। स्थानीय बीआरसी भवन पिथौरा में नवीन पाठ्य-पुस्तकों पर आधारित शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का द्वितीय चरण सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण विकासखंड स्रोत समन्वयक नरेश पटेल के निर्देशानुसार आयोजित किया गया है, जिसमें विकासखंड पिथौरा के सामाजिक अध्ययन विषय के 88 शिक्षक एवं संस्कृत भाषा के 50 शिक्षक सहभागिता कर रहे हैं।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार की गई नवीन पाठ्य-पुस्तकों की अवधारणा, संरचना एवं शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया से शिक्षकों को अवगत कराना है, ताकि कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी, गतिविधि-आधारित एवं छात्र-केन्द्रित बनाया जा सके।
बीआरसी पिथौरा में सामाजिक अध्ययन एवं संस्कृत पर शिक्षक प्रशिक्षण प्रशिक्षण जारी
प्रशिक्षण सत्रों में सामाजिक अध्ययन विषय के बीआरजी मनोज बरिहा, सियाराम साहू एवं नरेंद्र पटेल द्वारा नवीन पाठ्य-पुस्तकों के प्रमुख बिंदुओं, पाठ्यवस्तु में जोड़े गए नये तत्वों तथा शिक्षण विधियों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। वहीं संस्कृत भाषा विषय के रामप्यारे साहू, राजेश सावडे एवं महेश बघेल द्वारा संस्कृत पाठ्य-पुस्तकों में किए गए नवाचारों एवं सरल शिक्षण तकनीकों पर प्रकाश डाला जा रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान डीआरजी लोरीश कुमार ने भारत की सांस्कृतिक जड़ों, मूल्य आधारित शिक्षा एवं ब्लूम टेक्सोनॉमी के महत्व पर विशेष जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि समाज का अध्ययन विषय विद्यार्थियों को 21वीं सदी के वैश्विक परिप्रेक्ष्य से जोड़ने में सक्षम बनाता है तथा उनमें तार्किक सोच, विश्लेषण क्षमता एवं नागरिक बोध का विकास करता है।

इसके साथ ही प्रशिक्षण में योग, खेल एवं व्यावसायिक शिक्षा जैसे सह-पाठ्यक्रमीय विषयों पर भी जानकारी दी जा रही है, ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। प्रशिक्षकों द्वारा शिक्षकों को कक्षा में प्रयोगात्मक गतिविधियों, समूह कार्य एवं नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाने हेतु प्रेरित किया जा रहा है।शिक्षकों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें नवीन पाठ्य-पुस्तकों को बेहतर ढंग से समझने तथा छात्रों तक प्रभावी रूप से ज्ञान पहुंचाने में सहायता मिलेगी।




