बसना(जीतयादव)।शासकीय प्राथमिक शाला गौरटेक में प्रधान पाठक संतलाल मुखर्जी पर फर्जी दस्तावेज़ और शपथ-पत्रों में हेराफेरी का आरोप लगा है। आरटीआई कार्यकर्ता और प्रेस रिपोर्टर फिरोज खान (वार्ड 01, बसना) ने लगातार शिकायतें दर्ज कराईं, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने आखिरकार गहन जांच शुरू कर दी है।
अनुकंपा नियुक्ति में शिक्षक संतलाल मुखर्जी पर शपथ-पत्र और दस्तावेज़ में कथित हेराफेरी का आरोप।
घटनाक्रम के अनुसार, वर्ष 1995 में स्वर्गीय कन्हैया लाल चौहान (सहायक शिक्षक) की मृत्यु के बाद उनके परिवार के किसी सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति मिलनी चाहिए थी, लेकिन आरोप है कि संतलाल मुखर्जी ने फर्जी या गलत दस्तावेज़ (शपथ-पत्र, शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, निवास/जाति प्रमाण-पत्र आदि) प्रस्तुत कर पद हासिल किया। दस्तावेज़ों में कई शपथ-पत्र (27 जून 1995, रायपुर और 3 जुलाई 1995, सरायपाली) और हाई स्कूल सर्टिफिकेट (1987 और 1991 पैटर्न) शामिल हैं, जिनमें कथित विरोधाभास पाए गए। इस कारण कर्मायत बाई और उनके बेटे प्रेम सागर चौहान अब तक न्याय की प्रतीक्षा में हैं।
इसके बाद, 14 अक्टूबर 2025 को फिरोज खान ने जिला कलेक्टर महासमुंद को आवेदन दिया, जिसमें आरोप लगाया गया कि संतलाल मुखर्जी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए फर्जी दस्तावेज़ प्रस्तुत किए और तत्काल जांच, दोषी को निलंबित/बर्खास्त करने तथा FIR दर्ज करने की मांग की। लगभग 90 दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद, 20 जनवरी 2026 को फिरोज खान ने जनदर्शन में कलेक्टर को स्मरण पत्र सौंपा और दोहराया कि भ्रष्टाचार के प्रभाव से जांच रुकी हुई है।
इसके बाद 23 जनवरी 2026 को फिरोज खान ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई, जिसमें संतलाल मुखर्जी के अनुकंपा नियुक्ति में कथित अनियमितताओं का विवरण दिया गया। अंततः 13 मार्च 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद ने पत्र क्रमांक 1608/स्था.03/जांच/अनु.नियु./2026 जारी किया और बसना विकासखंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि शिकायत की गहन जांच करें। साथ ही 5 दिनों में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने और जांच की छायाप्रति संलग्न करने के निर्देश भी दिए गए। इस कार्रवाई की सूचना जिला कलेक्टर महासमुंद और शिकायतकर्ता फिरोज खान को भी दी गई (पत्र क्रमांक 1609)।
यह मामला अनुकंपा नियुक्ति नियमों के पालन और सरकारी पदों पर पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षा विभाग की यह कार्रवाई यह संकेत देती है कि अब शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जा रही है।



