बसना। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। इस फैसले से अदालत ने कहा है कि आरोपित को अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखना व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मूल अधिकार के खिलाफ हो सकता है, इसलिए जमानत देना आवश्यक है।

चैतन्य बघेल प्रकरण में अदालत का बड़ा फैसला, भाजपा की साजिश नाकाम
चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि वे राज्य में कथित शराब सिंडिकेट के माध्यम से प्राप्त प्राप्ति राशि को लॉन्डरिंग के ज़रिए अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में लगाया। आरोपियों ने कथित तौर पर सरकारी खजाने को बड़ी रकम का नुकसान पहुँचाया, और जांच एजेंसियों ने दावा किया कि यह प्रकरण 2019 से 2022 तक चला।

इस जमानत फैसले के बाद मोक्ष कुमार प्रधान, जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेस के प्रखर नेता ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “सत्य को जितना भी परेशान कर लो, उसे झूठ के बोझ तले दबाया नहीं जा सकता। आज फिर साबित हुआ है कि सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं।” प्रधान ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राजनीतिक द्वेष के चलते विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को डराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि बिना ठोस सबूत के नाम घसीटकर बदनाम करने की गलत नीयत से कार्रवाई की गई, लेकिन न्यायालय ने उस साजिश को नाकाम कर दिया।

मोक्ष कुमार प्रधान ने आगे कहा कि जब भाजपा सरकार महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे वास्तविक मुद्दों पर विफल हो जाती है, तब वह ध्यान भटकाने के लिए झूठे मामलों का सहारा लेती है। उन्होंने न्यायपालिका का समर्थन करते हुए कहा कि संविधान ज़िंदा है और तानाशाही सोच को हर बार जवाब देगा। यह फैसला केवल ज़मानत नहीं, बल्कि भाजपा की नकारात्मक राजनीति की हार भी है, जो लोकतंत्र के मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास कर रही थी।

यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर गरमागरम बहस का विषय बन गया है, जहां न्यायपालिका और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप दोनों ही समाज के समक्ष प्रमुख रूप से उभर रहे हैं।



