बसना(जीतयादव)।बरपेलाडीह से पीपलखूंटा को जोड़ने वाली पक्की सड़क आज पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। करीब 19 साल पहले पीडब्ल्यूडी द्वारा निर्मित इस सड़क से डामर पूरी तरह उखड़ चुका है, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही बेहद कठिन हो गई है। निर्माण के केवल दो साल बाद ही सड़क की परतें उधड़ने लगी थीं, और पिछले 10 वर्षों से यह सड़क केवल गिट्टी और मिट्टी का रास्ता बनकर रह गई है।

बरसात के मौसम में कीचड़ और जलभराव की समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि लोगों को पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। वहीं, गर्मी और सर्दी के मौसम में जगह-जगह गड्ढे और उभरे पत्थर यात्रियों के लिए खतरा बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है एक बार भी इसकी मरम्मत नहीं की गई, जिससे यह पूरी तरह टूट चुकी है।
सड़क जर्जर होने से आवागमन बाधित ग्रामीणों में भारी नाराजगी, शीघ्र मरम्मत की मांग।
ग्रामीणों ने बताया कि तीन किलोमीटर लंबी इस पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे, लेकिन घटिया निर्माण गुणवत्ता के कारण यह कुछ ही वर्षों में खराब हो गई। अब यह दुर्घटनाओं का गढ़ बन चुकी है—बाइक सवार अक्सर गिरकर घायल हो रहे हैं, वहीं चार पहिया वाहनों के टायरों से उड़ती गिट्टी राहगीरों को चोट पहुँचा रही है।

रात के समय वाहनों के फंसने या पुलिया पर गिरने की कई घटनाएँ हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूली बच्चे रोजाना इसी मार्ग से होकर बरपेलाडीह मिडिल स्कूल और स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय भूकेल जाते हैं, जिससे उन्हें सबसे ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

पूर्व जनपद सदस्य निरंजनी गोपीचंद पटेल और वर्तमान सरपंच श्रीकांत पटेल ने बताया कि इस मार्ग की मरम्मत के लिए कई बार शासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। राज्य सरकार के बजट में इस सड़क के जीर्णोद्धार की चर्चा हर साल होती है, परंतु मंजूरी आज तक नहीं मिली।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। लोगों का कहना है कि अब धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है — अब सिर्फ वादों से नहीं, सड़कों पर काम दिखाई देना चाहिए।




