महासमुंद: फर्जी आदेश से लिपिक की स्थायी पदस्थापना, DEO बोले– जानकारी नहीं
महासमुंद। जिले के शिक्षा विभाग में गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। शासन के आदेश को दरकिनार करते हुए एक सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी को कथित रूप से फर्जी आदेश के आधार पर स्थायी पदस्थापना दे दी गई। इस पूरे प्रकरण पर मौजूदा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय कुमार लहरे ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि यह कैसे हुआ, उन्हें जानकारी नहीं है।
मामला क्या है?
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 30 सितंबर 2022 को 45 सहायक ग्रेड-2 और ग्रेड-3 कर्मचारियों के तबादला आदेश जारी किए गए थे। इसमें जांजगीर-चांपा जिले के सक्ति से सहायक ग्रेड-3 प्रज्ञा मैत्री का ट्रांसफर महासमुंद विकासखंड के ग्राम अछोला स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में किया गया था।
लेकिन, अछोला स्कूल में पहले से ही सहायक ग्रेड-3 का पद भरा हुआ था। नियमानुसार, इस स्थिति में उनका तबादला निरस्त कर उन्हें उसी संस्था में वापस भेजा जाना चाहिए था। इसके बजाय उन्हें अछोला स्कूल में ज्वाइनिंग दे दी गई, जिसके चलते वेतन संबंधी समस्या खड़ी हो गई।
वेतन का इंतजाम और संशोधित आदेश
समस्या को सुलझाने के बजाय तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश पर प्रज्ञा मैत्री का वेतन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिरकोनी से अटैच कर दिया गया। इसके बाद 16 अक्टूबर 2024 को एक संशोधित आदेश जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि बिरकोनी में सहायक ग्रेड-3 का पद रिक्त है और प्रज्ञा मैत्री को वहीं स्थायी पदस्थापित किया जाता है।
लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह आदेश किसने जारी किया?
स्थापना शाखा सहित किसी भी अधिकारी ने इसकी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है।
फर्जी आदेश की आशंका
स्थापना शाखा–3 के कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें इस आदेश की कोई जानकारी नहीं है। वहीं DEO विजय कुमार लहरे ने कहा:
“प्रज्ञा मैत्री की स्थायी पदस्थापना कैसे हुई, मुझे जानकारी नहीं है। यह स्थापना शाखा से ही पता चलेगा। लेकिन जो भी हुआ, वह गलत हुआ है।”
उठते सवाल
यदि अछोला में पद भरा हुआ था, तो ज्वाइनिंग क्यों दी गई?
बिरकोनी में स्थायी पदस्थापना का आदेश किसके स्तर से जारी हुआ?
यदि आदेश फर्जी है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
यह पूरा मामला शिक्षा विभाग में प्रशासनिक अनियमितताओं और निगरानी की कमी की ओर इशारा करता है। अब देखने वाली बात होगी कि जिला स्तर पर इस कथित फर्जी आदेश की जांच किस तरह की जाती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।



