महासमुंद जिले में शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई : तीन सहायक शिक्षक निलंबित
महासमुंद। जिले के शिक्षा विभाग ने गंभीर लापरवाही बरतने वाले तीन सहायक शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय कुमार लहरे ने यह निर्णय लिया। निलंबित शिक्षकों में आकांक्षा मिश्रा, माया गुप्ता और विजिया डड़सेना शामिल हैं। इन सभी शिक्षकों पर आरोप है कि विभाग द्वारा किए गए युक्तियुक्तकरण (Rationalization) के बाद उन्हें नए विद्यालयों में पदस्थापना दी गई थी, लेकिन वे लंबे समय से वहां कार्यभार ग्रहण करने नहीं पहुंचे।
691 शिक्षकों का हुआ था युक्तियुक्तकरण
शिक्षा विभाग ने तीन महीने पहले महासमुंद जिले के अंतर्गत कुल 691 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया था। यह प्रक्रिया विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या, शिक्षकों की उपलब्धता और संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी। स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद अधिकतर शिक्षकों ने अपने नए पदस्थापना स्थलों पर कार्यभार ग्रहण कर लिया था, लेकिन कुछ शिक्षकों ने आदेशों का पालन नहीं किया।
तीनों शिक्षिकाओं का मामला
आकांक्षा मिश्रा : उन्हें परसकोल प्राथमिक शाला से स्थानांतरित कर शासकीय प्राथमिक शाला रामाडबरी भेजा गया था, जो मुख्यालय से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर है। विभाग ने उन्हें तीन बार स्पष्टीकरण का नोटिस भी जारी किया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और कार्यभार भी नहीं संभाला।
माया गुप्ता : इनका स्थानांतरण तुमाडबरी प्राथमिक शाला से पिथौरा विकासखंड के ठेल्कोदादर प्राथमिक शाला में हुआ था। आदेश के बावजूद वे नए विद्यालय में उपस्थित नहीं हुईं।
विजिया डड़सेना : इनका भी स्थानांतरण युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में किया गया था, लेकिन वे लगातार अनुपस्थित रहीं।
समाचार प्रकाशित होने के बाद विभाग सक्रिय
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एक प्रमुख अखबार में इस मामले को उजागर किया गया। इसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और जिम्मेदार अधिकारियों ने तुरंत जांच कराई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित शिक्षिकाएं जानबूझकर अपने कार्यस्थलों से अनुपस्थित थीं। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत कार्रवाई करते हुए तीनों शिक्षिकाओं को निलंबित कर दिया।
DEO ने कही सख्त बातें
जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने कहा कि “शिक्षक राष्ट्र निर्माण की धुरी होते हैं। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराएं। आदेशों की अवहेलना करना गंभीर कृत्य है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि कोई शिक्षक इस तरह की लापरवाही करेगा तो विभाग कठोर कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटेगा।
शिक्षा व्यवस्था पर असर
गांवों और कस्बों के कई प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में कुछ शिक्षक यदि अपने नए पदस्थापना स्थल पर नहीं पहुंचते, तो वहाँ बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ता है। स्थानीय अभिभावकों ने विभाग की इस कार्रवाई का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अब अन्य शिक्षक भी समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।
निलंबन के बाद आगे की प्रक्रिया
नियमों के अनुसार, निलंबित अवधि में संबंधित शिक्षिकाओं का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रहेगा। उन्हें निलंबन भत्ता मिलेगा, लेकिन वे किसी भी शिक्षण कार्य में भाग नहीं ले सकेंगी। विभागीय जांच के बाद उनके खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय होगी।
शिक्षा विभाग की सख्ती से संदेश
इस कार्रवाई से जिले के अन्य शिक्षकों को भी स्पष्ट संदेश गया है कि आदेश की अवहेलना करने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। त्योहारी सीजन और परीक्षा सत्र नजदीक होने के बावजूद, विभाग ने शिक्षकों को कर्तव्यनिष्ठा की याद दिलाई है। अधिकारियों ने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर अब कठोर निगरानी रखी जाएगी।


