बंसुला (रूपानंद साव) — बंसुला ग्राम अंतर्गत सुरगी नाला किनारे स्थित सार्वजनिक श्मशान घाट में 16 नवंबर को दाह संस्कार के लिए पहुंचे ग्रामीणों ने वहां संदिग्ध तांत्रिक गतिविधियों का दृश्य देखकर आश्चर्य और भय व्यक्त किया। ग्रामीणों के अनुसार मुक्तिधाम शेड के भीतर दो उल्टे मिट्टी के घड़े, जिनके मुंह पर लाल एवं पीला कपड़ा बंधा हुआ था, साथ ही सिंदूर, कपूर, बाती, दर्जनों मिट्टी के दीये, कपड़े के टुकड़े और अन्य सामग्रियां रखी हुई मिलीं। यह दृश्य किसी तांत्रिक अनुष्ठान अथवा अंधविश्वासी क्रियाकलाप की ओर संकेत करता प्रतीत हुआ, जिससे मौके पर मौजूद ग्रामीणों में आक्रोश और दहशत का माहौल बन गया।

ग्रामीणों ने बताया कि यह मुक्तिधाम कुबेर तेली समाज के समाजसेवी सदस्यों द्वारा अपने पूर्वजों की स्मृति में बनवाकर समस्त ग्रामवासियों को सार्वजनिक उपयोग के लिए समर्पित किया गया है। ऐसे पवित्र एवं सामाजिक स्थल पर इस प्रकार की गतिविधि देख ग्रामीणों में गंभीर नाराज़गी उत्पन्न हुई। घटना की जानकारी मिलते ही ग्राम सरपंच मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की समीक्षा की। इसके बाद ग्राम बैगा श्री खेमराज को बुलाकर मंत्रोच्चार एवं विधिवत प्रक्रिया के माध्यम से शुद्धिकरण पश्चात सामग्री को दहन कराया गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल भय और अविश्वास को जन्म देती हैं, बल्कि गांव में तनाव, अंधविश्वास और विवाद की स्थिति भी उत्पन्न कर सकती हैं। इससे पूर्व भी कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में छिपकर की जाने वाली तांत्रिक क्रियाओं के मामलों ने सामाजिक तनाव को बढ़ाया है।

ग्रामीणों ने निवेदन किया है कि रात्रि समय श्मशान स्थल के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना पंचायत, जिम्मेदार जनप्रतिनिधि अथवा पुलिस प्रशासन को दें।




