रायपुर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के आरोपी और ठेकेदार सुरेश चंद्राकर की भ्रष्टाचार मामले में जमानत याचिका खारिज कर दी है। सुरेश चंद्राकर पर करोड़ों रुपए की सड़क निर्माण परियोजना में गड़बड़ी करने, घटिया गुणवत्ता का काम कराने और फर्जीवाड़ा करने का आरोप है। इस मामले में 9 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।
पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्या के आरोपी सुरेश चंद्राकर की भ्रष्टाचार जमानत याचिका खारिज की।
मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने कहा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। सुरेश चंद्राकर को एक हत्या मामले में सह-आरोपी भी बताया गया है। ऐसे में नियमित जमानत देना उचित नहीं है। अदालत ने साफ किया कि आरोपों की गंभीरता और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत याचिका मंजूर नहीं की जा सकती।
मुकेश चंद्राकर हत्या से जुड़ा बाड़ा बुलडोजर से उजाड़ा गया
15 दिन पहले, सुरेश चंद्राकर के जिस बाड़े में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या हुई थी, उस पर बुलडोजर चलाया गया। चट्टान पारा इलाके में सरकारी जमीन पर बने इस बाड़े में 11 कमरे बनाए गए थे, जिन पर मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर का कब्जा था।
एसडीएम जागेश्वर कौशल ने बताया कि इसी बाड़े में पत्रकार की हत्या कर शव दफनाया गया था। आरोपी को कई बार नोटिस भेजे गए थे, लेकिन उसने कब्जा नहीं छोड़ा। उच्च न्यायालय में स्थगन के लिए लगाई गई उसकी याचिका भी खारिज हो चुकी थी। इसके बाद प्रशासन की टीम ने कायमी कार्रवाई की।
सड़क निर्माण परियोजना में कथित गड़बड़ी
सुरेश चंद्राकर पर आरोप है कि उसने सड़क निर्माण परियोजना में करोड़ों रुपए की गड़बड़ी की।
वर्ष 2009 में केंद्र सरकार ने सड़क आवश्यकता योजना (स्पेशल प्रोजेक्ट) शुरू की थी।
2009 के प्रोजेक्ट का एग्रीमेंट 2015 में हुआ।
गंगालूर से मिरतुर तक सड़क निर्माण के लिए लगभग 56 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए।
15 साल में सड़क की दूरी उतनी ही रही, लेकिन खर्च 120 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

सड़क निर्माण का ठेका 4 फर्मों को मिला, और हर 2 किमी की सड़क निर्माण के लिए अलग-अलग टेंडर जारी किए गए। कुल 32 किलोमीटर सड़क को 16 हिस्सों में बांटा गया और एग्रीमेंट किया गया।
घटिया निर्माण और तकनीकी खामियां
ठेकेदार सुरेश चंद्राकर ने 52 किलोमीटर सड़क को टुकड़ों में बनाया।
लगभग 12 से 15 किलोमीटर तक डामर बिछाया गया, लेकिन क्वालिटी इतनी घटिया थी कि कुछ ही दिनों में सड़क उखड़ गई।
बीच-बीच में गिट्टी और मुरम डाल दिया गया, जो चलने योग्य भी नहीं थी।
आरोप है कि परियोजना में कई जगह फर्जीवाड़ा और गुणवत्ताहीन काम किया गया।
पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्या को प्रशासन गंभीर मामला माना है और जांच के लिए चार्जशीट दाखिल की गई।
पुलिस और प्रशासनिक पहल
प्रशासन ने सड़क निर्माण परियोजना की समीक्षा और तकनीकी जाँच शुरू की है। इसके तहत डामर और अन्य सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण किया जा रहा है।उच्च न्यायालय में जमानत याचिका खारिज होने के बाद, सुरेश चंद्राकर को फिर से हिरासत में रखने की संभावना बढ़ गई है। मामले की सुनवाई लगातार जारी है और कोर्ट ने कहा है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी।




