महासमुंद: 10 सूत्रीय मांगों को लेकर NHM कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी
महासमुंद। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 13 दिनों से जिला मुख्यालय में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हुए हैं। नियमितीकरण, ग्रेड पे और लंबित वेतन वृद्धि जैसी प्रमुख मांगों को लेकर कर्मचारी लगातार आंदोलन कर रहे हैं और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अलग-अलग गतिविधियों का सहारा ले रहे हैं।
कांग्रेस भवन चौक में नोटिस पत्र जलाया
कर्मचारियों ने लोहिया चौक से रैली निकालकर कांग्रेस भवन चौक तक प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रशासन द्वारा जारी नोटिस पत्र को कर्मचारियों ने सार्वजनिक रूप से जलाया और विरोध जताया। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार बार-बार केवल आश्वासन दे रही है, लेकिन ठोस निर्णय लेने से बच रही है।
तेरहवें दिन कर्मचारियों ने अपने आंदोलन को अनोखे तरीके से “तेरही” के रूप में मनाया। धरना स्थल पर तख्तियाँ, बैनर और नारों के जरिए उन्होंने सरकार की नीतियों का विरोध किया। “मोदी की गारंटी झूठी है”, “दमन के आगे नहीं झुकेंगे”, “रोज़ी-रोटी दे न सके, ओ सरकार निकम्मी है”, “आटा है न दाल है, घर बुरा हाल है” और “नियमितीकरण लेकर रहेंगे” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा। इस मौके पर कर्मचारियों ने आम जनता को भी अपनी मांगों से अवगत कराया और समर्थन की अपील की।
महिला कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी
आंदोलन में महिला कर्मचारियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। तीजा और गणेश चतुर्थी जैसे पारंपरिक त्योहारों के बावजूद वे धरना स्थल पर डटी रहीं और आंदोलन का समर्थन किया। महिला कर्मचारियों ने साफ संदेश दिया कि उनकी लड़ाई अपने अधिकारों और सम्मान की है, जिसे वे अंत तक जारी रखेंगी।
स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप
NHM कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब आम जनता पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। उप स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। नियमित इलाज, जांच और दवाइयों की आपूर्ति बाधित हो चुकी है। मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
शासन के रवैये को जिम्मेदार ठहराया
कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने के लिए वे नहीं, बल्कि शासन का अड़ियल रवैया जिम्मेदार है। उनका कहना है कि बार-बार मांगों को अनदेखा किया जा रहा है और सरकार कर्मचारियों की समस्याओं को हल करने में गंभीर नहीं है।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष रामगोपाल खूंटे ने कहा कि जब तक नियमितीकरण, ग्रेड पे और लंबित 27% वेतन वृद्धि सहित सभी 10 सूत्रीय मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और तेज होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।



