
25 साल से फरार नक्सली, बीमारी से जूझते हुए भी चला रहा था नक्सली नेटवर्क, संयुक्त ऑपरेशन में हुआ अंत।
मुठभेड़ मैनपुर थाना क्षेत्र के दुर्गम मटाल पहाड़ी इलाके में हुई, जहां सुरक्षाबलों को बालकृष्ण की मौजूदगी की पुख्ता खुफिया सूचना मिली थी। इसके बाद एसटीएफ, कोबरा बटालियन और राज्य पुलिस की संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सुबह शुरू हुई गोलीबारी कई घंटों तक रुक-रुक कर चलती रही, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना रहा।
रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि जंगल में सर्चिंग के दौरान नक्सलियों से आमना-सामना हो गया और दोनों ओर से फायरिंग शुरू हो गई। सुरक्षा कारणों से और इलाके में आईईडी की आशंका को देखते हुए रात में तलाशी अभियान रोक दिया गया है।

मोडेम बालकृष्ण पिछले 25 वर्षों से फरार था और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। वह सेंट्रल कमेटी का सदस्य रह चुका था और ओडिशा राज्य कमेटी के सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहा था। हाल ही में 14 जनवरी को चलपती समेत 16 नक्सलियों के मारे जाने के बाद उसे धमतरी, गरियाबंद और नुआपड़ा डिवीजन को विस्तार देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इस बड़ी सफलता के पीछे एक सरेंडर नक्सली की अहम भूमिका रही। करीब 15 दिन पहले बालकृष्ण का गार्ड कैलाश आत्मसमर्पण कर चुका था, जिसने उसकी गतिविधियों और ठिकानों की अहम जानकारी सुरक्षाबलों को दी। इसी इनपुट के आधार पर संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
मानवीय पहलू की बात करें तो पुलिस सूत्रों के अनुसार मोडेम बालकृष्ण गंभीर बीमारियों से भी जूझ रहा था। वह शुगर से पीड़ित था, उसके सिर के बाल झड़ चुके थे और चलने के लिए दो लाठियों का सहारा लेता था। बावजूद इसके, वह नक्सली गतिविधियों का संचालन कर रहा था।
इस मुठभेड़ को सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, जिससे नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास की उम्मीद और मजबूत हुई है।