छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन का आंदोलन: रायपुर संभाग में पदोन्नति की मांग को लेकर 1 सितंबर को जेडी कार्यालय का घेराव
महासमुंद। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के महासमुंद जिलाध्यक्ष नारायण चौधरी ने जानकारी दी है कि रायपुर संभाग में ई और टी संवर्ग के शिक्षकों की पदोन्नति लंबे समय से अटकी हुई है। पिछले तीन वर्षों से माध्यमिक शाला प्रधान पाठक के पद पर पदोन्नति नहीं की गई है, जिसके कारण शिक्षकों में गहरा असंतोष व्याप्त है। एसोसिएशन का कहना है कि पदोन्नति न होने से शिक्षक संवर्ग न केवल आर्थिक दृष्टि से नुकसान झेल रहे हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी तनावग्रस्त और परेशान हैं। यही कारण है कि संगठन ने अब आंदोलन का रास्ता चुना है और आगामी 1 सितंबर को रायपुर स्थित संयुक्त संचालक (जेडी) कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है।
जिलाध्यक्ष चौधरी ने बताया कि यह आंदोलन अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चल रही मांगों और चरणबद्ध कार्यक्रम का हिस्सा है। पूर्व में छग टीचर्स एसोसिएशन रायपुर संभाग के प्रतिनिधि मंडल ने 18 अगस्त को आयुक्त रायपुर, डीपीआई और जेडी कार्यालय को मांग पत्र सौंपा था। उस समय संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि शीघ्र ही पदोन्नति प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन किया जाएगा। इसी अल्टीमेटम के तहत अब घेराव कार्यक्रम तय किया गया है।
एसोसिएशन ने 18 अगस्त के बाद विभिन्न चरणों में आंदोलन को आगे बढ़ाया। 22 अगस्त को सभी ब्लॉकों में प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय स्तर पर शिक्षकों ने पदोन्नति संबंधी मांगों को उठाया। इसके बाद 23 अगस्त को जिला मुख्यालय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। इस दौरान संयुक्त संचालक शिक्षा रायपुर संभाग के नाम ज्ञापन सौंपा गया और मांग की गई कि जल्द से जल्द पदोन्नति की समय-सारिणी जारी की जाए।
हालांकि इन आंदोलनों के बाद भी शिक्षकों की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं। इस बीच जेडी कार्यालय द्वारा केवल टी संवर्ग की पदोन्नति की समय सारिणी जारी कर दी गई, लेकिन ई संवर्ग, जिसमें पदों की संख्या सबसे अधिक है, उससे संबंधित कोई दिशा-निर्देश अब तक जारी नहीं किए गए। इस भेदभावपूर्ण रवैये से ई संवर्ग के शिक्षक गहरी निराशा और आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब पद उपलब्ध हैं और अन्य संवर्ग के लिए समय सारिणी जारी हो चुकी है, तो ई संवर्ग को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है।
एसोसिएशन के नेताओं का मानना है कि यह विलंब न केवल शिक्षकों के अधिकारों का हनन है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है। पदोन्नति के अभाव में योग्य और अनुभवी शिक्षकों को नेतृत्व की जिम्मेदारी नहीं मिल पा रही, जिससे स्कूल प्रबंधन और शैक्षणिक गतिविधियों की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
जिलाध्यक्ष चौधरी ने कहा कि शिक्षकों को पदोन्नति मिलना उनका वैधानिक और संवैधानिक अधिकार है। जब वर्षों से शिक्षक अपनी सेवाएँ पूरी निष्ठा और ईमानदारी से दे रहे हैं, तो उन्हें उच्च पद पर आगे बढ़ने का अवसर मिलना ही चाहिए। यदि पदोन्नति की प्रक्रिया में देरी की जाती है, तो यह शिक्षकों के आत्मसम्मान और मनोबल को तोड़ने का काम करेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब संगठन पीछे हटने वाला नहीं है। 1 सितंबर को रायपुर में होने वाले घेराव कार्यक्रम में संभाग भर से शिक्षक बड़ी संख्या में जुटेंगे और जेडी कार्यालय का घेराव कर अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखेंगे। साथ ही, सरकार और शिक्षा विभाग को यह चेतावनी भी दी जाएगी कि यदि पदोन्नति संबंधी समय-सारिणी शीघ्र जारी नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
एसोसिएशन के अनुसार, उनका यह संघर्ष केवल वेतन वृद्धि या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षक संवर्ग के सम्मान और शिक्षा व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा हुआ है। वे चाहते हैं कि शिक्षकों को समय पर पदोन्नति मिले ताकि उनका मनोबल बढ़े और वे और अधिक उत्साह के साथ छात्रों के भविष्य निर्माण में योगदान दे सकें।
अब देखना यह होगा कि 1 सितंबर को होने वाले घेराव से पहले शिक्षा विभाग कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो संभव है कि आंदोलन और व्यापक हो जाए और प्रदेश स्तर पर शिक्षा विभाग को बड़े दबाव का सामना करना पड़े।



