महासमुंद: बाल अधिकार और सुरक्षा पर “सुरक्षित पारा,सुरक्षित लइका मन 3.0” कार्यशाला संपन्न — बच्चों के समग्र विकास और जागरूकता पर दिया गया जोर
महासमुंद। शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय महासमुंद में शनिवार को विश्वविद्यालय के कार्यक्रम अधिकारियों के लिए “सुरक्षित पारा, सुरक्षित लइका मन फेस 3.0” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य बाल अधिकारों, सुरक्षा, शिक्षा और पोषण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना रहा।
कार्यशाला की शुरुआत करते हुए डॉ. मालती तिवारी ने कहा कि बीते कई वर्षों से इस अभियान के माध्यम से बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और पोषण पर लगातार कार्य किया जा रहा है। फेस 3.0 कार्यक्रम में भी यही प्रयास रहेगा कि समाज के हर वर्ग तक इस संदेश को पहुंचाया जाए ताकि हर बच्चा सुरक्षित और सशक्त बन सके।
प्रथम सत्र में छत्तीसगढ़ यूनिवर्सिटी से आए अभिषेक त्रिपाठी ने “सुरक्षित पारा, सुरक्षित लइका मन 3.0” के अंतर्गत होने वाली विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना, बाल अधिकारों की रक्षा करना और शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना है।
द्वितीय सत्र में वक्ताओं ने बताया कि बच्चों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब उन्हें संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच, उचित शिक्षा और स्नेहपूर्ण वातावरण प्राप्त हो। बाल संवर्धन के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यशाला के तृतीय सत्र में बाल शिक्षा और संरक्षण पर चर्चा हुई। इस दौरान प्राचार्य करुणा दुबे ने कहा कि कॉलेज के कार्यक्रम अधिकारी ग्राम स्तर पर जाकर समाज और बच्चों के बीच बाल अधिकारों व सुरक्षा को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाएंगे।
कार्यक्रम में रायपुर संभाग के महासमुंद, रायपुर, गरियाबंद, बलौदाबाजार और धमतरी जिलों के लगभग 100 कार्यक्रम अधिकारी शामिल हुए। समापन सत्र में डॉ. नीता बाजपेयी ने कहा कि “सुरक्षित पारा, सुरक्षित लइका मन” अभियान का मुख्य उद्देश्य है कि हर बच्चा सुरक्षित वातावरण में शिक्षा और जीवन का आनंद ले सके।


