बसना(जीतयादव)। कुरचुंडी की मां दुर्गा मछुआरा सहकारी समिति मर्यादित ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। समिति के सदस्य उन्नत तकनीक और आधुनिक संसाधनों की मदद से मत्स्य पालन कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।समिति में कुल 52 सदस्य हैं, जिनमें 15 महिलाएं और 37 पुरुष शामिल हैं। लगभग 85 हेक्टेयर जल क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से लगातार मत्स्य पालन किया जा रहा है। इससे समिति के सदस्य आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
मां दुर्गा मछुआरा सहकारी समिति ने उन्नत तकनीक और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज से बढ़ाया उत्पादन।
मछुआरा समिति के सदस्यों के अनुसार पहले वे खेती और मजदूरी पर निर्भर थे, जिससे उनकी आय सीमित थी और आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रहती थी। लेकिन मत्स्य पालन अपनाने के बाद उनकी आय में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। पहले जहां कुल उत्पादन 7 क्विंटल और आय लगभग 1 लाख 5 हजार रुपये थी, वहीं अब मत्स्य विभाग के सहयोग से उत्पादन बढ़कर 21 क्विंटल हो गया है और आय लगभग 3 लाख 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
मत्स्य विभाग द्वारा मां दुर्गा मछुआरा सहकारी समिति के सदस्यों को समय-समय पर वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण, निरीक्षण और मार्गदर्शन दिया गया। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के तहत जाल, आईस बॉक्स, मत्स्य बीज, सीफेक्स और मोटरसाइकिल अनुदान जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। इन संसाधनों से मछलियों को लंबे समय तक ताजा रखने और दूरस्थ बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिली है।
समिति के सदस्यों का पंजीयन एनएफडीपी पोर्टल में कर उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है। साथ ही राज्य के बाहर शैक्षणिक भ्रमण के माध्यम से नई तकनीकों की जानकारी भी दी गई है, जिससे उनके ज्ञान और कौशल में वृद्धि हुई है।
मत्स्य पालन से जुड़ने के बाद मां दुर्गा मछुआरा सहकारी समिति के सदस्यों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आर्थिक तंगी दूर होने के साथ सदस्य अपनी आय का एक हिस्सा भविष्य की सुरक्षा के लिए बैंक में जमा भी कर रहे हैं। विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी से महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है।



