पिथौरा (जीत यादव):- अंचल की लोक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक ऐतिहासिक करिया ध्रुवा एवं भगवती करिया धुरवाईन का तीन दिवसीय भव्य मेला बुधवार 3 दिसंबर से ग्राम अर्जुनी (पिथौरा) में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ प्रारंभ हो गया।
मेले के पहले दिन उत्तर रायपुर विधायक पुरन्दर मिश्रा ने मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और पूरे क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
सैकड़ों श्रद्धालु बने साक्षी, क्षेत्र में उत्सव का माहौल
महासमुंद जिले के पिथौरा मुख्यालय से राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर महज 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित इस पावन धाम में प्रतिवर्ष अगहन पूर्णिमा से आरंभ होने वाला यह मेला हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।
पहले ही दिन सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा क्षेत्र भक्तिरस से सराबोर दिखाई दिया।
मुख्य संरक्षक पुरन्दर मिश्रा ने की पूजा-अर्चना
करिया ध्रुवा महोत्सव मेला समिति के मुख्य आजीवन संरक्षक एवं विधायक पुरन्दर मिश्रा ने भगवान करिया ध्रुवा और भगवती करिया धुरवाईन के चरणों में पुष्प अर्पित कर पूजा की।
उन्होंने कहा कि— “इस पावन धाम की आस्था जन-जन में बसती है। यहां की परंपरा और संस्कृति सदियों पुरानी है। क्षेत्र की उन्नति और समृद्धि के लिए मैंने विशेष प्रार्थना की है।”
इस अवसर पर समिति के सदस्यों और क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से —
अनंत सिंह वर्मा, अधिवक्ता टिकेंद्र प्रधान, सादराम पटेल, प्रदीप पटेल, मुकेश पटेल, प्रियांशु दीक्षित, पूरन बरिहा, गणेश ध्रुव एवं विष्णु डडसेना शामिल थे।
आदिवासी परंपरा और गहरी आस्था का केंद्र
करिया ध्रुवा मंदिर की महत्ता इस क्षेत्र में अत्यंत गहरी है। स्थानीय बैगा परंपरा के अनुसार प्रतिदिन सुबह-शाम वैदिक और आदिवासी रीति-रिवाजों से पूजा-अर्चना की जाती है।
मान्यता है कि यहां पूजा करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, इसलिए हर साल दूर-दराज़ से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
रात में होंगे भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम
तीन दिवसीय मेले में प्रतिदिन भारी भीड़ जुटने की संभावना है। दिनभर खरीददारी, झूले और मनोरंजन के अलावा, प्रतिरात्रि भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी प्रसिद्ध लोक कला मंचों और सांस्कृतिक मंडलियों द्वारा विशेष प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिससे पूरे मेले का माहौल उत्साह, भक्ति और लोक-संस्कृति से भर जाएगा।



